टेक्सला टीवी के संस्थापक सरदार राजा सिंह ओबराय का निधन, संघर्ष से रची सफलता की मिसाल
Dehradun, 05 March: भारत के प्रतिष्ठित इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगपति और टेक्सला टीवी के संस्थापक अध्यक्ष सरदार राजा सिंह ओबराय का 28 फरवरी को लुधियाना में निधन हो गया। एक शरणार्थी बच्चे से देश के प्रभावशाली इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माताओं में शामिल होने तक की उनकी यात्रा साहस, मेहनत और उद्यमशीलता की प्रेरक कहानी रही।
1980 और 1990 के दशक में केबल टेलीविजन के विस्तार के दौर में टेक्सला देश के सबसे पहचानने योग्य टीवी ब्रांडों में शामिल हो गया था। कंपनी के किफायती टेलीविजन सेटों ने खासतौर पर दिल्ली और पंजाब समेत देश के मध्यमवर्गीय परिवारों के घरों तक टीवी को पहुंचाया।

विभाजन के दर्द से शुरू हुआ सफर
सरदार राजा सिंह ओबराय का जन्म 19 फरवरी 1936 को रावलपिंडी के पास मीरपुर के हिलन गांव में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में है। भारत विभाजन के दौरान उनका परिवार शरणार्थी बनकर भारत आया, उस समय उनकी उम्र मात्र 11 वर्ष थी।
दिल्ली में बसने के बाद उन्होंने एक सब्जी विक्रेता के यहां मजदूर के रूप में काम करना शुरू किया। औपचारिक शिक्षा न होने के बावजूद उनके भीतर व्यापार की मजबूत समझ और आगे बढ़ने का जज्बा था।
रेडियो से शुरू हुआ इलेक्ट्रॉनिक्स का सफर
1961 में उन्होंने ज्यूपिटर रेडियोज़ की स्थापना की, जहां किफायती रेडियो और ट्रांजिस्टर बनाए जाते थे। देखते ही देखते यह व्यवसाय बढ़ा और कंपनी हर साल करीब 1.5 लाख रेडियो सेट बनाने लगी। उनके उत्पाद आम भारतीय उपभोक्ताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो गए।
टेक्सला टीवी का स्वर्णिम दौर
1972 में सरदार राजा सिंह ओबराय ने टेक्सला टीवी के साथ टेलीविजन बाजार में कदम रखा। शुरुआत में कंपनी ने लगभग 2500 टीवी सेट बनाए, लेकिन जल्द ही यह ब्रांड तेजी से लोकप्रिय हो गया।
1988-89 तक टेक्सला हर साल करीब तीन लाख ब्लैक एंड व्हाइट और कलर टीवी सेट का उत्पादन करने लगा। उनके पुत्र सरदार इंदरजीत सिंह ओबराय के अनुसार 1980 के दशक के अंत से लेकर 2000 के शुरुआती वर्षों तक पंजाब के टीवी बाजार में टेक्सला की हिस्सेदारी लगभग 95 प्रतिशत तक पहुंच गई थी।
इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग में विस्तार
व्यवसाय को मजबूत करने के लिए उन्होंने कई उद्योग स्थापित किए।
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1979 – दिल्ली में राजकमल इंडस्ट्रीज की स्थापना (टीवी के लकड़ी के कैबिनेट निर्माण के लिए)
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1982 – टेक्सला ने रंगीन टेलीविजन श्रृंखला लॉन्च की
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1983 – कम लागत वाले पोर्टेबल ब्लैक एंड व्हाइट टीवी बाजार में उतारे
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लुधियाना – दो लाख टीवी सेट सालाना क्षमता वाली नई यूनिट स्थापित
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1986 – नंदपुर (लुधियाना) में मुलार्ड ट्यूब्स लिमिटेड की स्थापना (पिक्चर ट्यूब निर्माण)
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1987 – नोएडा में बेस्टाविजन इलेक्ट्रॉनिक्स की शुरुआत
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1988 – पटना में दूसरी उत्पादन इकाई
1989 में एक ही वर्ष में तीन लाख टीवी सेट उत्पादन के लिए टेक्सला को राष्ट्रीय उत्पादकता पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
शिक्षा और समाज सेवा में योगदान
औपचारिक शिक्षा न होने के बावजूद सरदार राजा सिंह ओबराय शिक्षा के महत्व को गहराई से समझते थे। उन्होंने गुरु राम दास एजुकेशनल ट्रस्ट की स्थापना की।
इस ट्रस्ट के अंतर्गत कई शैक्षणिक संस्थान संचालित होते हैं, जिनमें प्रमुख हैं—
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जीआरडी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट एंड टेक्नोलॉजी, राजपुर रोड, देहरादून
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जीआरडी अकादमी स्कूल
उन्होंने सरब सांझी गुरबानी पहल भी शुरू की, जिसका उद्देश्य ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग और धार्मिक कार्यक्रमों के माध्यम से गुरु ग्रंथ साहिब की शिक्षाओं का प्रचार करना है।
1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान उन्होंने कई पीड़ित परिवारों को रोजगार और आर्थिक सहायता देकर मानवीय संवेदनशीलता का परिचय दिया।
परिवार आगे बढ़ा रहा विरासत
समय के साथ परिवार ने कई अन्य क्षेत्रों में भी व्यवसाय का विस्तार किया, जिनमें शामिल हैं—
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टेक्सला प्लास्टिक्स एंड मेटल्स – प्लास्टिक निर्माण
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डार्क आई – रोड सेफ्टी प्रोडक्ट्स
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निर्वाण लग्जरी होटल – हॉस्पिटैलिटी सेक्टर
वर्तमान में परिवार नोएडा में टेलीविजन उत्पादन इकाई का संचालन कर रहा है और साथ ही शिक्षा, मैन्युफैक्चरिंग और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्रों में सक्रिय है।
संघर्ष से सफलता की मिसाल
सरदार राजा सिंह ओबराय का जीवन इस बात का उदाहरण है कि मजबूत इच्छाशक्ति और मेहनत से कठिन परिस्थितियों को भी सफलता में बदला जा सकता है। बिना औपचारिक शिक्षा के एक शरणार्थी बच्चे से लेकर भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री के अग्रणी उद्यमी बनने तक उनकी कहानी आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
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