चारधाम यात्रा में मौसम सबसे बड़ी चुनौती
Dehradun, 08 September: उत्तराखंड में चारधाम यात्रा का दूसरा चरण शुरू हो चुका है, लेकिन मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रहीं। बारिश के कारण भूस्खलन, भूधंसाव और भूकटाव लगातार यात्रियों के कदम रोक रहे हैं। हाईवे और पैदल मार्गों पर पत्थरों के गिरने का सिलसिला जारी है।

भले ही उम्मीद जताई जा रही है कि 15 सितंबर से यात्रा रफ्तार पकड़ लेगी, लेकिन मौजूदा हालात देखकर ऐसा संभव होता नहीं दिख रहा। खासकर इसलिए कि चारधाम के कपाट बंद होने में अब केवल डेढ़ माह का समय बचा है।
गंगोत्री और यमुनोत्री सबसे कठिन राह
6 सितंबर से बदरीनाथ और केदारनाथ धाम की यात्रा शुरू हो चुकी है और यहां यात्रियों की संख्या भी ठीकठाक है। लेकिन गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की स्थिति अब भी गंभीर है। धराली आपदा के बाद गंगोत्री-यमुनोत्री हाईवे बेहद खतरनाक हो गया है।
हर्षिल और धराली के बीच भागीरथी नदी तथा स्यानाचट्टी में यमुना नदी पर बनी झील ने सड़कों को कमजोर कर दिया है। कई जगह हाईवे धंस रहा है। विशेषकर यमुनोत्री हाईवे अभी भी खतरे का पर्याय बना हुआ है। यही कारण है कि पिछले कई दिनों से दोनों ही धामों में एक भी यात्री नहीं पहुंच सका है।
हेली सेवा की भी चुनौती
सरकार की ओर से दावा किया जा रहा है कि 15 सितंबर से केदारनाथ और हेमकुंड साहिब के लिए हेली सेवा शुरू कर दी जाएगी और इसके लिए 10 सितंबर से टिकट बुकिंग भी हो जाएगी। मगर मौसम की अनिश्चितता इस योजना पर सवाल खड़े कर रही है।
अब तक चारधाम पहुंचे श्रद्धालु
| धाम | यात्री संख्या |
|---|---|
| यमुनोत्री | 5,86,492 |
| गंगोत्री | 6,69,214 |
| केदारनाथ | 14,82,647 |
| बदरीनाथ | 12,96,324 |
| हेमकुंड साहिब | 2,52,083 |
| कुल | 42,86,760 |
(आंकड़ा 7 सितंबर तक का)

