नारीशिल्प गर्ल्स इंटर कॉलेज, कनाट प्लेस में आयोजित हुआ भावपूर्ण कार्यक्रम
देहरादून:वरिष्ठ सीपीएम नेता, अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय काउंसिल सदस्य एवं उत्तराखंड किसान सभा के पूर्व अध्यक्ष कामरेड कमरुद्दीन को उनके निधन पर श्रद्धांजलि देने के लिए आज कनाट प्लेस स्थित नारी शिल्प गर्ल्स इण्टर कालेज के सभागार में एक भव्य एवं भावपूर्ण सभा का आयोजन किया गया। देहरादून में आयोजित इस कार्यक्रम में सीपीएम सहित विभिन्न राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, किसान-मजदूर संघों के पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
आज 11 बजे सुबह से ही कार्यक्रम स्थल पर श्रद्धांजलि देने वालों का तांता लगा रहा। कामरेड कमरुद्दीन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की गई और उनके जीवन के संघर्षमय पहलुओं को याद किया गया। पूरा वातावरण गंभीर, भावुक एवं क्रांतिकारी संकल्प से ओत-प्रोत रहा।
मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुऐ कामरेड डाक्टर बिक्रम सिंह — केन्द्रीय कमेटी सदस्य ने कहा “कामरेड कमरुद्दीन सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे। उन्होंने बचपन से लेकर अंतिम साँस तक हर पल किसानों, खेतिहर मजदूरों और शोषितों के हक़ की लड़ाई में गुज़ारा। उनकी सादगी, अडिगता और नीतियों से कभी समझौता न करने वाला स्वभाव उन्हें अलग करता था।”
सीपीएम केन्द्रीय कार्यकारिणी सदस्य — राजेन्द्र सिंह नेगी
“यह वही इंसान है, जिसने उत्तराखंड में किसान संगठन को जड़ से मज़बूत किया। हर गाँव, हर टोले तक उन्होंने किसानों को संगठित किया। आज जो मज़बूत नींव है, उसकी एक-एक ईंट उनके परिश्रम की देन है।”
कामरेड राजेंद्र पुरोहित — CPI(M) उत्तराखंड, राज्य सचिव ने विचार व्यक्त करते हुऐ कहा कामरेड कमरुद्दीन ने 1990 के दशक में उत्तराखंड आंदोलन के दौरान भी किसानों के मुद्दों को अलग से उठाकर एक अलग पहचान बनाई थी। उन्होंने सभावाला गाँव को संगठन का केंद्र बनाया और युवाओं को राजनीतिक जागरूकता से जोड़ा।कामरेड शिवप्रसाद देवली — जिला सचिव,उन्होंने कामरेड कमरुद्दीन की जेल-यात्राओं, आंदोलनों और उनकी मधुर मुस्कान के क्षणों को संजोया। बताया कि उन्होंने गरीबों की जमीन छुड़वाने के लिए भूमाफियाओं से जी-तोड़ संघर्ष किया और दर्जनों झूठे मुकदमों का सामना किया, लेकिन कभी पीछे नहीं हटे।
सीपीआई राष्ट्रीय परिषद के पू्र्व सदस्य समर भण्डारी एवं माले राज्यसचिव इन्देश मैखुरी ने कहा उन्होंने किसान आंदोलन में उनके अतुलनीय योगदान को रेखांकित किया।
· कांग्रेस नेता गुलजार अहमद ने उन्हें सामाजिक न्याय का सच्चा सिपाही बताया।
· आजाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष आजाद अली ने भाईचारे और जनहित के मुद्दों पर उनकी अडिग प्रतिबद्धता को याद किया।
यूकेडी के केन्द्रीय महामंत्री लताफत हुसैन, उत्तराखण्ड आन्दोलनकारी संयुक्त परिषद के संरक्षक बालेश बबानिया, किसान नेता दलजीतसिंह, एस एफ आई के राज्य अध्यक्ष नितिन मलेठा, सीटू राज्य सचिव लेखराज,एआईएलयू के महामंत्री शम्भूप्रसाद ममगाई, एस एफ आई जिलासचिव अय्याज, महामंत्री शैलेन्द्र परमार, महामंत्री जेएम एस दमयन्ती नेगी आदि वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि कामरेड कमरुद्दीन का जाना सिर्फ उनके परिवार या दल के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है। उनके अधूरे सपनों और संघर्षों को आगे बढ़ाना ही सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कामरेड कमरुद्दीन के पुत्र नफीस शुभचिंतकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा—”पिता जी हमेशा कहते थे कि इंसान अपनी उम्र से नहीं, अपनी कर्मभूमि से बड़ा होता है। उन्होंने पूरी ज़िंदगी समाज के अंतिम पायदान पर खड़े इंसानों के लिए जीयी। उनकी याद हमारे लिए प्रेरणा है, उनके अधूरे सपनों को पूरा करना हमारी ज़िम्मेदारी होगी।”
कार्यक्रम के अंत में सभी उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उनको श्रृद्धांजलि अर्पित की,फिर पूरा वातावरण क्रांतिकारी नारों से गूँज उठा—
“कामरेड कमरुद्दीन अमर रहें!”
“कामरेड कमरुद्दीन को लाल सलाम!”
“संघर्ष जारी रहेगा — किसान-मजदूर एकता जिंदाबाद!”
इस अवसर पर कामरेड डॉ.एच पी यादव, अनन्त आकाश,, अजय शर्मा,एडवोकेट अलास्मुस्दीन सिद्दीकी, आर.पी. डोभाल, अशोक शर्मा, याकूब अली, जाहिद अंजुम, ताजवर सिंह रावत, विजय भट्ट, सुधा देवली, जगदीश राणा, गुमान सिंह, गयूर अहमद, शैलेन्द्र परमार, रंजन सोलंकी, इकराम, इस्लाम,प्रदीप कुमार,शम्भूप्रसाद ममगाई, जानकी चौहान, अयाज खान, गजेन्द्र वर्मा, इन्देश नौटियाल, विजय पाह्वा, कुसुम नौडियाल, अभिषेक भण्डारी, अनिल गोस्वामी, विनोद खण्डूरी, मोनिका, सोहन सिंह रावत, चित्रा, एन.एस. पंवार, रोशन मौर्य, सीमा सहित बडी संख्या में राजनैतिक, सामाजिक संगठनों के लोग मौजूद थे
कामरेड कमरुद्दीन की याद में श्रद्धांजलि सभा,विभिन्न दलों व संगठनों ने दी श्रद्धांजलि







