उत्तराखंड: रेल–हाथी टकराव पर लगेगी लगाम, AI सिस्टम से मिलेगी तुरंत चेतावनी
Ramnagar, 08 February: उत्तराखंड के तराई क्षेत्र में रेल पटरियों और वन्यजीवों, विशेषकर हाथियों, के बीच बढ़ते टकराव को रोकने के लिए भारतीय रेलवे ने तकनीक आधारित समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। पूर्वोत्तर रेलवे के इज्जतनगर मंडल के अंतर्गत संवेदनशील रेल खंडों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम स्थापित किया जा रहा है। यह प्रणाली लगभग 99.18 रूट किलोमीटर लंबे कॉरिडोर में लागू की जाएगी, जिससे वन्यजीव संरक्षण के साथ-साथ रेल परिचालन की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।
एआई तकनीक से हाथियों की पहचान, तुरंत मिलेगा अलर्ट
इस आधुनिक प्रणाली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह डिस्ट्रीब्यूटेड एकॉस्टिक सेंसर (DAS) तकनीक पर आधारित है। ऑप्टिकल फाइबर के जरिए रेल ट्रैक पर होने वाले सूक्ष्म कंपन और हाथियों की चाल से जुड़े पहले से रिकॉर्ड किए गए पैटर्न को सिस्टम तुरंत पहचान लेता है। जैसे ही कोई हाथी या झुंड रेलवे ट्रैक के पास आता है, संबंधित लोको पायलट, स्टेशन मास्टर और कंट्रोल रूम को तत्काल अलर्ट भेज दिया जाता है। इससे समय रहते ट्रेन की रफ्तार कम करने या आवश्यकता पड़ने पर उसे रोकने का निर्णय लिया जा सकता है।
रेल और वन विभाग की साझा रणनीति
रेलवे प्रशासन इस पहल को केवल तकनीक तक सीमित नहीं रख रहा है, बल्कि इसे एक समग्र सुरक्षा रणनीति के रूप में लागू किया जा रहा है। वन विभाग के सहयोग से ट्रेनों की गति सीमा तय करने, चेतावनी संकेत लगाने, अंडरपास निर्माण, बाड़बंदी, हनी-बी बजर डिवाइस, थर्मल कैमरे और अन्य उपाय भी साथ-साथ किए जा रहे हैं। इसके अलावा हाथियों की प्राकृतिक आवाजाही को सुरक्षित बनाए रखने के लिए एलिफेंट कॉरिडोर विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
पहले चरण में इन रेल खंडों पर लगेगा सिस्टम
पहले चरण में 24 रूट किलोमीटर में एआई आधारित इंट्रूजन डिटेक्शन सिस्टम लगाया जा रहा है। इसमें
- लालकुआं–गुलरभोज (15.8 किमी),
- छतरपुर–हल्दी रोड (1.2 किमी),
- हल्दी रोड–लालकुआं (2.7 किमी),
- पंतनगर–लालकुआं (1.2 किमी) और
- लालकुआं–हल्द्वानी (3.2 किमी)
शामिल हैं। इसके अलावा काशीपुर–रामनगर और खटीमा–बनबसा रेल खंडों पर भी कार्य प्रगति पर है, जो प्रमुख हाथी गलियारों से जुड़े हुए हैं।
अन्य राज्यों के लिए भी बन सकता है मॉडल
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड में अपनाया जा रहा यह एआई आधारित मॉडल देश के अन्य वन्यजीव-संवेदनशील रेल मार्गों के लिए भी मिसाल बन सकता है। इससे न केवल हाथियों जैसी संरक्षित प्रजातियों की जान बचेगी, बल्कि रेल दुर्घटनाओं में भी उल्लेखनीय कमी आने की संभावना है।
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