विरासत 2025 में नृत्यांगना अरुणिमा कुमार के कुचिपुड़ी नृत्य से बही भक्ति की लहर
Dehradun, 15 October: राजधानी में चल रहे सांस्कृतिक समारोह ‘विरासत 2025’ में बुधवार की शाम भारतीय शास्त्रीय नृत्य की रंगीन छटा बिखर गई। अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कुचिपुड़ी नृत्यांगना अरुणिमा कुमार की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

नृत्यांगना अरुणिमा कुमार की प्रस्तुति ने जीता दिल
‘अर्धनारीश्वर’ प्रस्तुति ने मोहा मन
कार्यक्रम की शुरुआत ‘सूर्य स्तुति’ से हुई, जिसने पूरे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा भर दी। इसके बाद उन्होंने ‘अर्धनारीश्वर’, ‘देव देवम भजे’, ‘कलिंग नर्तनम’, ‘शिव तरंगम’ और ‘दुशासन वध’ जैसे मनोहारी पदों की सशक्त प्रस्तुति दी।
‘अर्धनारीश्वर’ की प्रस्तुति राग मालिका और ताल मालिका पर आधारित थी, जिसने शिव और शक्ति के अद्वैत भाव को जीवंत कर दिया। वहीं ‘कलिंग नर्तनम’ थिल्लाना में बालकृष्ण के कालिया सर्प पर नृत्य दृश्य ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।
इस प्रस्तुति में अरुणिमा के साथ कोर्नेलिया और बिद्या ने भी सहभागिता की। मंच पर ताल, भाव और मुद्राओं के संगम ने शास्त्रीय नृत्य की परंपरा को नई ऊँचाई दी।

कुचिपुड़ी की चमकती पहचान: अरुणिमा कुमार
भारतीय शास्त्रीय नृत्य जगत में अरुणिमा कुमार का नाम अनमोल सितारे की तरह चमकता है। उन्हें संगीत नाटक अकादमी द्वारा 2008 में उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। सिर्फ 7 वर्ष की आयु में कुचिपुड़ी सीखना शुरू करने वाली अरुणिमा ने पद्म भूषण स्वप्ना सुंदरी से प्रारंभिक प्रशिक्षण लिया। वह पद्मश्री गुरु जयराम राव और वनश्री राव की वरिष्ठ शिष्या हैं और पिछले 15 वर्षों से देश-विदेश में नृत्य प्रस्तुत कर रही हैं। उन्होंने त्रिवेणी कला संगम (नई दिल्ली) में वर्ष 1995 में अपना अरंगेत्रम प्रस्तुत किया था। तब से अब तक वह चित्रांगदा, नल–दमयंती जैसे कई प्रसिद्ध बैले में अभिनय कर चुकी हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किया भारत का प्रतिनिधित्व
वर्तमान में अरुणिमा लंदन में निवास करती हैं और एरिसेंट समूह में मानव संसाधन सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं। साथ ही, वह भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की मान्यता प्राप्त कलाकार हैं और आकाशवाणी व दूरदर्शन की ‘ए’ ग्रेड कलाकार भी हैं।
कलाओं के प्रति समर्पण को सामाजिक उद्देश्य से जोड़ते हुए अरुणिमा ने अपना कला फाउंडेशन ‘Arts Extend’ स्थापित किया है, जो युवाओं में कला के प्रति जागरूकता और छोटे शहरों में शांति व सद्भाव को बढ़ावा देने का कार्य कर रहा है। महोत्सव के दौरान दर्शकों ने भी अरुणिमा की प्रस्तुति की सराहना करते हुए प्रस्तुति को आध्यात्मिक अनुभव बताया।
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