Uttarakhand की Chenap Valley को मिला Trek of the Year 2025 का खिताब
Dehradun, 08 September: चमोली जिले के जोशीमठ विकासखंड की गोद में बसी ‘Chenap Valley’ चेनाप घाटी (चिनाप) आखिरकार उस पहचान तक पहुंच गई, जिसकी वह लंबे समय से हकदार थी। उत्तराखंड पर्यटन विभाग ने इसे ट्रेक ऑफ द ईयर–2025 घोषित किया है। यह घोषणा न सिर्फ प्रदेश के लिए गर्व का क्षण है, बल्कि अब इस घाटी की खूबसूरती को दुनिया तक पहुंचाने का मौका भी बनेगी।
13 हजार फीट पर बसी रंगों की घाटी
जोशीमठ नगर से करीब 28 किलोमीटर दूर, समुद्रतल से 13,000 फीट की ऊंचाई पर फैली यह घाटी अपने आप में एक प्राकृतिक अजूबा है। सोना शिखर के पास पांच वर्ग किलोमीटर में फैली चेनाप घाटी सामने औली, उर्गम और खीरों घाटी की वादियों और पीछे हिमालय की बर्फ से लदी चोटियों के बीच किसी स्वप्नलोक जैसी लगती है। जून से अक्टूबर तक यहां 315 से ज्यादा प्रजातियों के दुर्लभ फूल खिलते हैं, लेकिन अफसोस यह कि अब तक यह स्थान पर्यटन मानचित्र पर कहीं दर्ज नहीं हो पाया।

कुदरत की कारीगरी
चेनाप घाटी की सबसे खास पहचान हैं यहां की फूलों की क्यारियां, जिन्हें स्थानीय लोग ‘फुलाना’ कहते हैं। ब्रह्मकमल से सजी ये क्यारियां इतनी सुव्यवस्थित लगती हैं मानो किसी शिल्पकार ने इन्हें तराशा हो। लोककथाओं में कहा जाता है कि यहां आंछरी (परियां) आकर फूलों की खेती करती हैं। घाटी सिर्फ फूलों की ही नहीं, बल्कि दुर्लभ जड़ी-बूटियों और वन्य जीवों का भी खजाना है।
जुलाई से सितंबर – सबसे नायाब नज़ारा
हालांकि घाटी बारहों महीने सुंदर रहती है, लेकिन असली नजारा जुलाई से सितंबर के बीच देखने को मिलता है। इस दौरान रंग-बिरंगे फूल घाटी को ऐसे सजा देते हैं, जैसे प्रकृति ने धरती पर अपनी पेंटिंग उतारी हो। सितंबर के बाद फूल तो मुरझा जाते हैं, पर हरियाली का आकर्षण बना रहता है।
बंगाल के पर्यटकों की पसंद
दिलचस्प बात यह है कि भले ही देश-दुनिया में चेनाप घाटी का नाम बहुत कम लोग जानते हों, लेकिन बंगाल के पर्यटक यहां अक्सर पहुंचते हैं। बिना सुविधाओं के भी वे इस रोमांचक सफर को बार-बार चुनते हैं।
तीन दिन का रोमांच
घाटी तक पहुंचने का मुख्य रास्ता जोशीमठ के मारवाड़ी पुल से होकर जाता है। पहला पड़ाव थैंग गांव, दूसरा धार खर्क और तीसरे दिन यात्रियों के सामने खुलती है फूलों से लदी जन्नत – चेनाप घाटी।
आपदा के बाद मिली पहचान
2013 की आपदा के बाद फूलों की घाटी (वैली ऑफ फ्लॉवर्स) का रास्ता क्षतिग्रस्त हो गया। उसी समय से प्रकृति प्रेमियों ने चेनाप घाटी का रुख करना शुरू किया और धीरे-धीरे इसका नाम लोगों की जुबान पर चढ़ने लगा।

घाटी के अनूठे आकर्षण
- चनाण हल – देवता लाटू द्वारा हर साल ‘हल चलाने’ की मान्यता से जुड़ी फूलों की क्यारी।
- लाटू कुंड – घाटी का प्राचीन जलस्रोत, जो अब दलदल का रूप ले चुका है।
- जाख भूत धारा – काला डांग चोटी से गिरता विशाल झरना।
- मस्क्वास्याणी – ब्रह्मकमल की विशाल क्यारी।
- फुलाना बुग्याल – ढलानों पर जड़ी-बूटियों और फूलों से भरा चरागाह।
- काला डांग – बर्फ से ढकी काली चोटी, जो घाटी का स्थायी पहरेदार है।
पुराणों में भी उल्लेख
मान्यता है कि गंधमादन और बदरीवन की तुलना में चेनाप के फूलों की खुशबू सबसे विशिष्ट है। कहा जाता है कि राजा विशाला के यज्ञ के बाद गंधमादन और बदरीवन की सुगंध खत्म हो गई और चेनाप का महत्व और बढ़ गया।
पहचान की लंबी जद्दोजहद
1987 से लेकर अब तक कई बार इसे पर्यटन मानचित्र पर लाने की कोशिशें हुईं – कभी औली में राष्ट्रीय खेलों के दौरान, कभी नेताओं और अधिकारियों की यात्राओं के जरिए। लेकिन यह घाटी हमेशा पहचान को तरसती रही। अब जाकर उसे वह सम्मान मिला है, जिसका इंतजार सालों से था।

