विरासत 2025 में बेगम परवीन सुल्ताना के सुरों ने बांधा समां

विरासत 2025 में बेगम परवीन सुल्ताना के सुरों ने बांधा समां

विरासत में बेगम परवीन सुल्ताना की गायकी का जलवा, सुरों से सजी अद्भुत शाम

Dehradun, 16 October: देहरादून की ठंडी हवा में जब सुरों की लहर उठी, तो हर दिल ने उसे महसूस किया। विरासत 2025 के मंच पर बेगम परवीन सुल्ताना ने अपनी मधुर गायकी से ऐसा जादू बुना कि पूरा सभागार रागों के समंदर में खो गया। उनकी आवाज़ में शास्त्रीयता की गहराई थी, श्रद्धा की मिठास थी और सुरों की वह ऊँचाई, जहाँ कला आराधना बन जाती है।

विरासत 2025 में बेगम परवीन सुल्ताना के सुरों ने बांधा समां
बेगम परवीन सुल्ताना के सुरों ने बांधा समां

विरासत 2025 की सुरमयी शाम में जब पद्मश्री और पद्म भूषण से सम्मानित गायिका बेगम परवीन सुल्ताना मंच पर आईं, तो पूरा सभागार सुरों की भक्ति में डूब गया। उनके साथ हारमोनियम पर पंडित विनय मिश्रा, तबले पर उस्ताद अकरम खान और तानपुरा पर खुशी ने सधी हुई संगत दी। कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि मंच पर उनकी बेटी शादाब खान ने भी तानपुरा पर संगत कर संगीत परंपरा की विरासत को आगे बढ़ाया।

सुरों की साधना और भावों की ऊँचाई

हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की दुनिया में बेगम परवीन सुल्ताना को अनमोल रत्नों में शुमार किया जाता है। उनकी गायकी की पहचान है— असाधारण स्वर विविधता, स्पष्टता और भावनात्मक गहराई।
उनकी आवाज़ चार सप्तकों तक फैली हुई है, जो क्षण भर में ध्यान की शांति से लेकर ईश्वर के प्रबल आह्वान तक पहुँच जाती है।
चाहे ख़याल, ठुमरी या भजन, परवीन सुल्ताना की हर प्रस्तुति में कला और आत्मा का अनूठा संगम दिखता है।

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विरासत में बेगम परवीन सुल्ताना की गायकी का जलवा
विरासत में बेगम परवीन सुल्ताना की गायकी का जलवा

बाल प्रतिभा से बनीं संगीत सम्राज्ञी

अफ़ग़ान मूल के एक संगीत परिवार में जन्मी परवीन सुल्ताना ने पाँच वर्ष की आयु में संगीत प्रशिक्षण शुरू किया। उनकी मां ने उनकी अद्भुत प्रतिभा को बचपन में ही पहचान लिया था। उन्होंने प्रसिद्ध संगीतज्ञ पंडित चिन्मय लाहिड़ी से शिक्षा प्राप्त की और बारह वर्ष की उम्र में सार्वजनिक मंच पर पहली बार प्रस्तुति दी। उनके संगीत में लता मंगेशकर की कोमलता और क्लासिकल ठहराव का अद्भुत संतुलन देखने को मिलता है।

शास्त्रीय संगीत की दुनिया में अनमोल रत्न हैं बेगम परवीन सुल्ताना
शास्त्रीय संगीत की दुनिया में अनमोल रत्न हैं बेगम परवीन सुल्ताना

फिल्मी जगत में भी छोड़ी गहरी छाप

बेगम परवीन सुल्ताना ने अपने करियर की शुरुआत अब्दुल मजीद की असमिया फिल्म मोरोम तृष्णा से की थी। उन्होंने हिंदी फिल्मों कुदरत, गदर, दो बूंद पानी और पाकीज़ा जैसी फिल्मों के लिए भी गीत गाए।
फिल्म कुदरत का सदाबहार गीत “हमें तुमसे प्यार कितना…” आज भी भारतीय संगीत का अमर रत्न माना जाता है, जिसमें उनकी साढ़े चार सप्तकों तक फैली स्वर सीमा का अद्भुत प्रदर्शन देखने को मिला।

पुरस्कार और उपलब्धियाँ

परवीन सुल्ताना को संगीत के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए पद्मश्री, पद्म भूषण, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, गंधर्व कलानिधि, मियां तानसेन पुरस्कार और असम सरकार के संगीत सम्राज्ञी सम्मान से नवाजा जा चुका है।

 

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Ravi Priyanshu

Ravi Priyanshu is a journalist, novelist, and Founder & Editor-in-Chief of The India Vox. With 23+ years of experience, he is dedicated to credible journalism and meaningful storytelling.

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