विरासत 2025: लोक, कला, संगीत और खुशबुओं से महका देहरादून

विरासत 2025: लोक, कला, संगीत और खुशबुओं से महका देहरादून

विरासत 2025: लोक, कला, संगीत और खुशबुओं से महका देहरादून

Dehjradun, 17 October: देहरादून में चल रहा विरासत 2025 महोत्सव अब अपने चरम पर है। हर शाम संस्कृति, संगीत, स्वाद और सौंदर्य का ऐसा संगम देखने को मिल रहा है, जिसने देहरादून की ठंडी हवा में भी कला की गर्माहट घोल दी है। कुमाऊंनी गीतों की गूंज, ग़ज़लों की महक, बांसुरी की सरगम और दुबई परफ्यूम्स की खुशबू, सबने मिलकर विरासत की शामों को यादगार बना दिया।

विरासत की संध्या में कुमाऊनी गीतों का जादू
विरासत की संध्या में कुमाऊनी गीतों का जादू

विरासत की संध्या में कुमाऊनी गीतों का जादू

विरासत महोत्सव की शुक्रवार की संध्या में कुमाऊनी लोकसंगीत की आत्मा पूरे मंच पर उतर आई। कार्यक्रम का शुभारंभ देवी नंदा-सुनंदा की वंदना “जय नंदा सुनंदा…” के मधुर स्वरों से हुआ, जिसे मुख्य गायक गिरीश सनवाल ‘पहाड़ी’ और प्रसिद्ध लोकगायिका शकुन्तला रमोला की जोड़ी ने अपने स्वर-सौंदर्य से जीवंत कर दिया। उनके साथ स्वर-संगत में मीना नेगी, शिवम् सनवाल, सत्यम सनवाल, ढोलक पर अनुज, और ऑक्टोपैड पर आशीष नेगी ने शानदार ताल मिलाई। मंच पर नृत्य के माध्यम से भावाभिव्यक्ति देने वालों में रजनी नेगी, ममता, वंशिका, किरन, रवि शाह, राजीव और नीरज शामिल रहे। “संस्कृति एक सामाजिक संस्था” की टीम का नेतृत्व वंदना सनवाल ने किया।

“जय नंदा सुनंदा…” के बाद कुमाऊनी लोकधुनों का सिलसिला चलता रहा, “रंगीली बिंदी घागर काई…” और “चंदना म्यार पहाड़ आए…” जैसे गीतों ने पूरी विरासत की महफ़िल को झूमने पर मजबूर कर दिया। इन गीतों में देवी-देवताओं की आस्था, पहाड़ की मिट्टी की सुगंध और लोकजीवन की मधुर झंकार महसूस की जा सकती थी।

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विशेष आकर्षण रहा श्रृंगार/छोलिया नृत्य, जिसने लोक संस्कृति की पारंपरिक वीरता और सौंदर्य दोनों को मंच पर उतार दिया। श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साह बढ़ाया और देहरादून की शाम लोकसंगीत के उल्लास से सराबोर हो उठी।

दुबई परफ्यूम्स से महका ‘विरासत 2025’
दुबई परफ्यूम्स से महका ‘विरासत 2025’

दुबई परफ्यूम्स से महका ‘विरासत’

विरासत मेले की सांस्कृतिक चहल-पहल के बीच दुबई परफ्यूम्स का स्टॉल इस बार भी सबका ध्यान आकर्षित कर रहा है। यह स्टॉल पिछले कई वर्षों से विरासत का हिस्सा रहा है, और इस बार भी इसकी विशेष अरबी खुशबुओं ने लोगों को मोहित कर लिया। विक्रेता ने बताया कि देहरादून की जनता का रिस्पॉन्स हमेशा से शानदार रहता है।
यहाँ आने वाले लोग न केवल परफ्यूम और इत्तर की गहरी सुगंधों को पसंद करते हैं, बल्कि उनकी क्वालिटी और लॉन्ग-लास्टिंग असर के कारण बार-बार खरीदारी करने लौटते हैं। स्टॉल पर अरबी ऊद की भारी खुशबू से लेकर फ्लोरल और फ्रूटी नोट्स तक की पूरी श्रृंखला मौजूद है।

बकलावा की मिठास से मीठा हुआ ‘विरासत 2025’
बकलावा की मिठास से मीठा हुआ ‘विरासत 2025’

बकलावा की मिठास से मीठा हुआ ‘विरासत 2025’

अगर संगीत ने मन को रिझाया, तो स्वाद ने दिल जीत लिया। इस बार विरासत 2025 में जो स्टॉल लगातार लोगों का मन मोह रहा है, वह है बकलावा स्वीट्स स्टॉल, जो असली मिडिल ईस्ट के पारंपरिक मिठास का स्वाद दे रहा है। स्टॉल संचालकों ने बताया कि इस साल उनका अनुभव बेहद शानदार रहा। उन्होंने कहा कि यहाँ आने वाले लोग न केवल हमारी मिठाइयाँ पसंद करते हैं, बल्कि उनके पीछे की संस्कृति और कहानी में भी रुचि दिखाते हैं। इस बार स्टॉल पर बकलावा, कुनाफा चॉकलेट्स, और अरेबिक डिलाइट्स विशेष आकर्षण बने हुए हैं। लोगों ने स्वाद और परंपरा के इस मिश्रण को खूब सराहा है।
विक्रेताओं का कहना है कि “विरासत का माहौल” उन्हें घर जैसा लगता है, जहाँ हर संस्कृति का स्वाद एक साथ परोसा जाता है।

देबोप्रिया और सुचिस्मिता चटर्जी की बाँसुरी ने बांधा समां
देबोप्रिया और सुचिस्मिता चटर्जी की बाँसुरी ने बांधा समां

शुभ महाराज के तबले ने बांधा समा

विरासत की चौदहवीं संध्या भारतीय शास्त्रीय संगीत की दिव्यता को समर्पित रही। मंच पर जब बांसुरी बहनें, देबोप्रिया और सुचिस्मिता चटर्जी उतरीं तो पूरा वातावरण बाँसुरी की मधुरता, कोमलता और गहराई से भर गया। दोनों बहनों ने अपने वादन से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी प्रस्तुति में तबले पर पंडित शुभ महाराज की संगत ने संगीत को और ऊँचाई दी। वाद्य और स्वर के बीच ऐसा संतुलन बना जिसने पूरी शाम को जादुई बना दिया।

शुभ महाराज के तबले ने बांधा समा
उस्ताद अहमद हुसैन और मोहम्मद हुसैन की शाही शाम

उस्ताद अहमद हुसैन और मोहम्मद हुसैन की शाही शाम

शाम-ए-ग़ज़ल की इस संध्या ने विरासत के मंच को सुरों की महक से सराबोर कर दिया।
प्रसिद्ध ग़ज़ल जोड़ी उस्ताद अहमद हुसैन और उस्ताद मोहम्मद हुसैन ने जब अपनी आवाज़ में “रिफ़ाक़त” और “गुलदस्ता” जैसी ग़ज़लों के अंश छेड़े, तो वातावरण में अद्भुत सुकून और नज़ाकत घुल गई। दोनों उस्तादों ने अपनी विशिष्ट ठहराव भरी गायकी और भावनात्मक प्रस्तुति से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनके साथ संगत में तबले पर उस्ताद अख्तर असब, सारंगी पर उस्ताद कमाल अहमद, गिटार पर शिवेंद्र, और सिंथेसाइज़र पर संदीप ने मंच साझा किया। श्रोताओं ने हर बंदिश पर तालियाँ बजाकर संगीतकारों को सम्मान दिया। जयपुर घराने की परंपरा से जुड़े इन कलाकारों को संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, पद्मश्री, और लोकमत सुर ज्योत्सना राष्ट्रीय संगीत सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है। उन्होंने फिल्म “वीर-ज़ारा” में भी संगीत दिया और भारत सहित कई देशों में चैरिटी कॉन्सर्ट्स कर कला को समाजसेवा से जोड़ा।

 

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Ravi Priyanshu

Ravi Priyanshu is a journalist, novelist, and Founder & Editor-in-Chief of The India Vox. With 23+ years of experience, he is dedicated to credible journalism and meaningful storytelling.

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