कान्हा शांति वनम में आयोजित कार्यक्रम में राज्यपाल गुरमीत सिंह ने लिया भाग
गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान को बताया मानवता और सहिष्णुता का सर्वोच्च उदाहरण
Dehradun, 30 April: गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष के अवसर पर, पूज्य बाबूजी महाराज की 127वीं जयंती और तुकडोजी महाराज की 117वीं जयंती के साथ संयुक्त रूप से भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम कान्हा शांति वनम स्थित हार्टफुलनेस मुख्यालय के विश्व के सबसे बड़े ध्यान कक्ष में आयोजित हुआ।
भारत सरकार का संस्कृति मंत्रालय और हार्टफुलनेस द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम के दूसरे दिन परिसर शबद कीर्तन की मधुर ध्वनियों और सामूहिक ध्यान से गूंज उठा। देशभर से 30,000 से अधिक लोग इसमें शामिल हुए, जबकि विश्वभर से अनेक लोगों ने वर्चुअल रूप से सहभागिता की। प्रतिभागियों ने प्रेरणादायक प्रवचन, प्रदर्शनी और गुरु तेग बहादुर जी के जीवन पर आधारित विशेष फिल्म का आनंद लिया तथा सामूहिक ध्यान के लाभ प्राप्त किए।
इस अवसर पर पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि), केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत व संस्कृति मंत्रालय के सचिव विवेक अग्रवाल सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। इनके अतिरिक्त मेजर सुनील दत्त द्विवेदी (विधायक, फतेहगढ़), अर्पित दुबे और ईश्वर आचार्य (संयुक्त सचिव, मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान), काशीनाथ समागड़ी (निदेशक) तथा समाजसेवी गुरलाद सिंह कहलोन भी उपस्थित रहे।
प्रख्यात गायक डॉ. अलंकार सिंह ने मधुर शबद कीर्तन प्रस्तुत किया, जिसके बाद विचार गोष्ठी, प्रदर्शनी और फिल्म प्रदर्शन हुआ। इसके पश्चात सामूहिक ध्यान सत्र दाजी (हार्टफुलनेस मार्गदर्शक एवं श्री राम चंद्र मिशन के अध्यक्ष) द्वारा संचालित किया गया। राष्ट्रसंत समुदाय के सदस्य भी उत्साहपूर्वक इसमें सम्मिलित हुए।
अपने संबोधन में राम नाथ कोविंद ने कहा:
“भारत महान आध्यात्मिक गुरुओं की भूमि है, जिन्होंने सदैव मानवीय मूल्यों का मार्गदर्शन किया है। मानव अधिकारों की रक्षा, धर्म और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए निडरता से खड़ा होना गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षाओं का मूल है। बाबूजी महाराज ने हमें आध्यात्मिक साधना में निरंतरता का संदेश दिया, जबकि तुकडोजी महाराज ने मानवता के उत्थान का मार्ग दिखाया। हम सौभाग्यशाली हैं कि इस पावन अवसर पर इन महान संतों की शिक्षाओं से प्रेरणा प्राप्त कर रहे हैं।”

राज्यपाल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यहां पर ध्यान करते हुए एक अद्भुत अनुभूति मिली है। उन्होंने कहा कि कान्हा शांति वनम केवल एक आश्रम नहीं, बल्कि वैश्विक आध्यात्मिक चेतना का केंद्र है, जहाँ साधना, सेवा और समर्पण के माध्यम से मानवता के एकत्व का संदेश प्रसारित हो रहा है। उन्होंने “एक मानवता, एक हृदयः श्री गुरु तेग बहादुर जी की शिक्षाएँ” विषय पर उद्बोधन दिया। राज्यपाल ने श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन और बलिदान का स्मरण करते हुए कहा कि उनका त्याग मानवता, धार्मिक स्वतंत्रता और सत्य के प्रति अडिगता का सर्वोच्च उदाहरण है। उन्होंने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने अपने प्राणों का बलिदान देकर यह सिद्ध किया कि सच्चा धर्म वही है, जो दूसरों के धर्म की रक्षा के लिए भी खड़ा हो।
राज्यपाल ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी का बलिदान केवल इतिहास का प्रसंग नहीं, बल्कि आज के समय के लिए एक जीवंत प्रेरणा है। वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में, जब विश्व असहिष्णुता और विभाजन जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनकी शिक्षाएँ शांति, सहिष्णुता और मानवता का मार्ग दिखाती हैं। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि वे ध्यान, आत्मचिंतन और सेवा के मार्ग को अपनाकर अपने जीवन को सार्थक बनाएं। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में ध्यान न केवल एकाग्रता बढ़ाता है, बल्कि व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण में भी सहायक है।
इस आयोजन का उद्देश्य सभी धर्मों के लोगों को एक मंच पर लाकर गुरु तेग बहादुर जी और बाबूजी महाराज के सत्य, एकता और सार्वभौमिक चेतना के संदेश को आत्मसात करना है, साथ ही तुकडोजी महाराज की सेवा भावना को भी आगे बढ़ाना है।
गुरु तेग बहादुर जी, जिन्हें “हिंद दी चादर” के नाम से भी जाना जाता है, ने धार्मिक स्वतंत्रता और मानव गरिमा की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उनका संदेश था कि व्यक्ति न तो किसी से डरे और न ही किसी को डराए।
इस वर्ष बाबूजी महाराज की जयंती के साथ गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी वर्ष और तुकडोजी महाराज की शिक्षाओं का संगम इस आयोजन को और भी विशेष बनाता है, जो एकता, सेवा और आध्यात्मिकता का संदेश देता है।
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