विश्व का सबसे बड़ा पारद शिवलिंग तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के बाद श्रद्धालुओं के लिए समर्पित, देशभर से पहुंचे 2000 से अधिक भक्त
Harodwar | June 18, 2026
धर्मनगरी हरिद्वार के श्री साई शिव गंगा धाम में 5211 किलोग्राम वजनी विश्व के सबसे बड़े पारद शिवलिंग की तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा विधि श्रद्धा, वैदिक मंत्रोच्चार और आध्यात्मिक वातावरण के बीच सम्पन्न हुई। इस ऐतिहासिक आयोजन में देशभर से आए 2000 से अधिक श्रद्धालुओं, संत-महात्माओं, साधकों और विशिष्ट अतिथियों ने सहभागिता की।
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ध्यान गुरु रघुनाथ गुरुजी द्वारा लगभग दस वर्षों की साधना, अनुसंधान और पारद विज्ञान के गहन अध्ययन के बाद निर्मित यह शिवलिंग भारतीय आध्यात्मिक परंपरा, ध्यान साधना और पारद विज्ञान का अद्भुत संगम माना जा रहा है। शिवलिंग के निर्माण में पारा, चांदी, स्वर्ण तथा 108 प्रकार की औषधीय जड़ी-बूटियों के अर्क का उपयोग किया गया है। आध्यात्मिक जगत से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार यह अपने प्रकार का विश्व का सबसे बड़ा पारद शिवलिंग है।
प्राण प्रतिष्ठा समारोह गुरु गोरक्षनाथ परंपरा, गिरनार के पूज्य पीर योगी महंत सोमनाथ बापू के आशीर्वाद तथा पद्मभूषण डॉ. विजय भटकर के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ। आयोजन का उद्देश्य विश्व शांति, मानव कल्याण और सकारात्मक चेतना के संदेश को जन-जन तक पहुंचाना रहा।
रघुनाथ गुरुजी ने कहा कि यह शिवलिंग केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं, बल्कि ध्यान, आत्मचिंतन और सकारात्मक ऊर्जा का केंद्र है। उन्होंने बताया कि वर्षों की साधना और अनुसंधान से तैयार यह दिव्य शिवलिंग मानव कल्याण और आध्यात्मिक जागरण का संदेश देता है।
तीन दिनों तक चले इस महोत्सव में वैदिक यज्ञ, मंत्रोच्चार, ध्यान साधना, आध्यात्मिक प्रवचन और विभिन्न धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं ने इसे अध्यात्म, सेवा और सामाजिक सद्भाव का महापर्व बताया।
समारोह में अनेक प्रतिष्ठित संत एवं धर्माचार्य उपस्थित रहे। इनमें जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी जी महाराज, सुधांशु जी महाराज, स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज, स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज, स्वामी रविन्द्र पुरी जी महाराज, साध्वी ऋतंभरा जी, आचार्य मनीष जी, सांसद राघव चड्ढा तथा राज्य मंत्री एवं गंगा सभा अध्यक्ष नितिन गौतम सहित अनेक गणमान्य अतिथि शामिल रहे।
इस भव्य आयोजन को सफल बनाने में उद्योगपति एवं समाजसेवी राजीव बंसल की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजन की व्यवस्थाओं और समन्वय में उनके योगदान की व्यापक सराहना की गई। समापन अवसर पर रघुनाथ गुरुजी ने सभी संतों, श्रद्धालुओं, स्वयंसेवकों और सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि हजारों लोगों की उपस्थिति वाला यह आयोजन सामूहिक सेवा और समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है।
समारोह के दौरान “ध्यान से शांति, शांति से सद्भाव और सद्भाव से विश्व कल्याण” का संदेश दिया गया। श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को अध्यात्म, विज्ञान, सेवा और मानव कल्याण के संगम के रूप में एक ऐतिहासिक पहल बताया।
रघुनाथ गुरुजी सामाजिक सरोकारों से भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। दिव्यांग आत्मनिर्भरता, महिला किसान सशक्तिकरण, पर्यावरण संरक्षण और नवाचार आधारित सामाजिक अभियानों के माध्यम से वे समाज के विभिन्न वर्गों के उत्थान के लिए कार्य कर रहे हैं। इसी क्रम में दिव्यांग इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (DICCAI) के माध्यम से दिव्यांगजनों को स्वरोजगार और आर्थिक सशक्तिकरण से जोड़ने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
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