बोर्ड मार्क्स से हटकर अब कंप्यूटर आधारित टेस्ट बना दाख़िले की असली कसौटी, जानिए CUET का पूरा असर
Dehradun, 04 February: देश के केंद्रीय विश्वविद्यालयों में दाख़िले की प्रक्रिया अब पूरी तरह बदल चुकी है। 12वीं बोर्ड परीक्षा में अच्छे अंक लाने के बावजूद अब कॉलेज में सीट मिलना तय नहीं रह गया है। इसकी वजह है CUET-UG, जिसने कॉलेज एडमिशन के पूरे सिस्टम को एक समान परीक्षा के दायरे में ला दिया है।
बोर्ड से बाहर, टेस्ट के अंदर
पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी, BHU और JNU जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में दाख़िला सीधे बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर होता था, लेकिन CUET लागू होने के बाद प्रवेश प्रक्रिया की दिशा ही बदल गई है। अब बोर्ड के नंबर केवल eligibility तक सीमित रह गए हैं, जबकि असली प्रतिस्पर्धा computer based test में होती है। इस परीक्षा का एक ही स्कोर पूरे देश के विश्वविद्यालयों में मान्य होता है।
शिक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह बदलाव merit standardization के लिए लाया गया है, ताकि अलग-अलग बोर्डों की मार्किंग असमानता खत्म की जा सके, लेकिन इसके साथ ही छात्रों पर एक ही परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन का मानसिक दबाव भी पहले से कहीं ज़्यादा बढ़ गया है।
CUET में क्या है सबसे बड़ा बदलाव?
- अलग-अलग बोर्ड की marking inequality खत्म
- Subject-wise परीक्षा व्यवस्था
- General Test की बढ़ती भूमिका
- Multiple universities के लिए single exam
लेकिन यहीं से एक नई बहस भी शुरू होती है।
कोचिंग बनाम नॉन-कोचिंग छात्र
CUET के बाद कोचिंग इंडस्ट्री में तेज़ उछाल देखा गया है। शहरी इलाकों के छात्र जहां paid coaching, test series और mock exams का लाभ उठा रहे हैं, वहीं गांव-कस्बों के छात्रों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गया है।
सवाल यह है कि क्या CUET वाकई सभी को बराबरी का मौका देता है, या तैयारी के संसाधन ही नया फ़िल्टर बन गए हैं?
CUET-UG 2026: बिना कोचिंग कैसे करें तैयारी?
1. NCERT ही सबसे बड़ी कोचिंग
CUET के ज़्यादातर सवाल सीधे NCERT concepts पर आधारित होते हैं।
- Line-by-line reading
- Examples और exercises पर फोकस
- Theory के साथ application की समझ
2. General Test को हल्के में न लें
Quant, Reasoning और GK कई courses में game-changer साबित हो रहे हैं।
- रोज़ 30 मिनट reasoning practice
- Basic maths revision
- Daily current affairs (short notes बनाकर)
3. Free Resources का सही इस्तेमाल
- NTA के official mock tests
- YouTube पर free quality lectures
- Previous year CUET papers (pattern समझने के लिए)
4. Coaching नहीं, consistency ज़रूरी
Education experts मानते हैं:
“कोचिंग advantage दे सकती है, लेकिन selection की गारंटी नहीं।”
Daily disciplined study, mock analysis और weak areas पर लगातार काम ही असली रणनीति है।
CUET से किन कॉलेजों में मिलता है एडमिशन?
CUET-UG के ज़रिये देश के केंद्रीय, राज्य, डीम्ड और निजी विश्वविद्यालयों में दाख़िला मिलता है।
प्रमुख विश्वविद्यालय
Central Universities
- Delhi University (DU)
- Banaras Hindu University (BHU)
- Jawaharlal Nehru University (JNU)
- Aligarh Muslim University (AMU)
- Jamia Millia Islamia
State Universities
- University of Allahabad
- Guru Gobind Singh Indraprastha University (GGSIPU)
- Deen Dayal Upadhyaya Gorakhpur University
Deemed / Private Universities
- Tata Institute of Social Sciences (TISS – select programs)
- Galgotias University
- UPES (कुछ courses)
CUET कब से लागू हुआ?
CUET-UG की शुरुआत साल 2022 से की गई।
- 2022: पहली बार CUET-UG लागू
- 2023–24: अधिक विश्वविद्यालय शामिल
- 2025–26: कॉलेज एडमिशन का मुख्य आधार बना CUET
लागू करने का उद्देश्य
- बोर्ड मार्किंग असमानता खत्म करना
- सभी छात्रों के लिए एक समान प्रवेश परीक्षा
- पारदर्शी और merit-based admission system
दाख़िला प्रक्रिया में ध्यान देने योग्य बातें
CUET लागू होने के बावजूद हर विश्वविद्यालय अपने-अपने course-wise cut-off या merit list अलग से जारी करता है। दाख़िले की प्रक्रिया में केवल CUET स्कोर ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी eligibility criteria भी उतनी ही अहम होती है। यानी CUET score + eligibility मिलकर ही admission तय होता है।
इसके साथ ही, CUET के तहत शामिल कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की सूची हर साल NTA portal पर अपडेट की जाती है, जिसे अभ्यर्थियों को नियमित रूप से देखना चाहिए।
CUET ने competition ज़रूर बढ़ाया है, लेकिन opportunities भी उतनी ही बढ़ाई हैं। अब एक ही परीक्षा के ज़रिये छात्र कई universities के लिए eligible हो सकता है। ज़रूरत है सही guidance, धैर्य और घबराहट से दूर रहने की।
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