न्यूज़रूम में एंट्री ले चुका है AI सिस्टम
New Delhi, 28 January: डिजिटल दौर में पत्रकारिता तेज़ी से बदल रही है। अब खबर सिर्फ़ इंसान नहीं लिख रहा, बल्कि मशीनें भी लिखने लगी हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब न्यूज़रूम का हिस्सा बन चुका है। सवाल अब ये नहीं है कि तकनीक आएगी या नहीं —
सवाल ये है कि इस बदलाव में पत्रकारिता की आत्मा बचेगी या नहीं?
जब खबरें सिस्टम लिखने लगे
आज कई मीडिया संस्थान AI का इस्तेमाल कर रहे हैं। स्पोर्ट्स स्कोर, शेयर बाजार, मौसम, ट्रेंड रिपोर्ट, डेटा एनालिसिस, ऑटो हेडलाइन, वीडियो स्क्रिप्ट, वॉइस न्यूज — सब कुछ अब सेकेंडों में तैयार हो जाता है। जो काम पहले घंटों में होता था, वो अब कुछ सेकेंड में हो रहा है। न्यूज़रूम अब सिर्फ़ रिपोर्टरों से नहीं चलता, अब उसे एल्गोरिदम और सिस्टम भी चला रहे हैं।
पत्रकारिता का बदला हुआ ढांचा
पहले खबर बनती थी ज़मीन से — रिपोर्टर जाता था, देखता था, समझता था, महसूस करता था। लेकिन अब खबर बन रही है डेटा से — क्लिक, व्यू, लाइक, शेयर और ट्रेंड से। अब सवाल ये नहीं कि क्या सच है?
बल्कि सवाल ये बन गया है कि क्या ट्रेंड कर रहा है?
AI क्या कर सकता है… और क्या नहीं
AI बहुत तेज़ है। वह लाखों डेटा लाइनें पढ़ सकता है, रिपोर्ट बना सकता है, खबर लिख सकता है।
लेकिन AI ये नहीं कर सकता:
- दर्द महसूस करना
- डर समझना
- अन्याय पर गुस्सा होना
- पीड़ित की आंखों की भाषा पढ़ना
- सच के लिए जोखिम उठाना
- सत्ता से सवाल करना
लेकिन इस सबके बाद भी AI सूचना तो बना सकता है, लेकिन संवेदना नहीं।
सुविधा के साथ खतरा भी
जहाँ तकनीक सुविधा देती है, वहीं खतरे भी लाती है। आज Deepfake वीडियो, फर्जी AI खबरें, नकली इंटरव्यू और झूठी कहानियाँ इतनी असली दिखने लगी हैं कि सच और झूठ में फर्क करना मुश्किल होता जा रहा है। अब खतरा सिर्फ़ गलत खबर का नहीं, खतरा है सोच के कंट्रोल का। अगर सिस्टम तय करने लगे कि जनता क्या देखे, तो पत्रकारिता लोकतंत्र नहीं, एल्गोरिदम बन जाएगी।
इंसान पत्रकार क्यों ज़रूरी है
इंसान पत्रकार सिर्फ़ रिपोर्टर नहीं होता। वह समाज की आवाज़ होता है। वह सवाल पूछता है, डरता नहीं। वह सच के साथ खड़ा रहता है, सुविधा के साथ नहीं। उसके पास मशीन से बड़ी ताकत है, वो है उसका ज़मीर।
भविष्य: टकराव नहीं, संतुलन
भविष्य AI और इंसान की लड़ाई का नहीं है। भविष्य साझेदारी का है।
जहाँ:
- AI तकनीक संभाले
- AI डेटा संभाले
- AI सिस्टम संभाले
और
- इंसान दिशा तय करे
- इंसान मूल्य तय करे
- इंसान तय करे कि क्या सही है, क्या गलत
डिजिटलवाला एआई एकेडमी के संस्थापक निदेशक प्रो. डॉ. शिव कुमार दादर का मानना है कि तकनीक कभी समस्या नहीं होती, समस्या होती है उसका इस्तेमाल। अगर पत्रकारिता सिर्फ़ सिस्टम बन गई, तो वो जनता से कट जाएगी। लेकिन अगर पत्रकारिता में इंसानियत ज़िंदा रही, तो तकनीक भी समाज की ताकत बन जाएगी।
Crime से जुड़ी अन्य खबरें: यहां पढ़ें
Technology से जुड़ी अन्य खबरें: यहां पढ़ें
Politics से जुड़ी अन्य खबरें: यहां पढ़ें
Education से जुड़ी अन्य खबरें: यहां पढ़ें

