श्रद्धा पूर्वक मनाया गुरु हरगोबिंद साहिब जी का 431वां पावन प्रकाश पर्व

श्रद्धा पूर्वक मनाया गुरु हरगोबिंद साहिब जी का 431वां पावन प्रकाश पर्व

गुरु हरगोबिंद साहिब के प्रकाश पर्व पर गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में भक्ति एवं सेवा का संगम

Dehradun, June 30, 2026

गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा, आढ़त बाजार में सिखों के छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब जी के प्रकाश पर्व के अवसर पर श्रद्धा और उत्साह के साथ विशेष धार्मिक समागम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में संगत ने उपस्थित होकर गुरु महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया।

समागम की शुरुआत नितनेम से हुई, जिसके बाद नरेंद्र सिंह ने आसा की वार का भावपूर्ण गायन किया। बीबी भानी जत्थे की महिलाओं ने सुखमनी साहिब का पाठ किया, जबकि हजूरी रागी भाई जनक सिंह जी ने “वड्डा मेरा गोविंद अगम अगोचर” शब्द का गायन कर संगत को आध्यात्मिक रस से सराबोर किया।

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गुरुद्वारा के हेड ग्रंथी ज्ञानी शमशेर सिंह ने अपने प्रवचन में गुरु हरगोबिंद साहिब के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु साहिब ने मीरी-पीरी की परंपरा स्थापित कर धर्म और शासन के संतुलन का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि गुरु हरगोबिंद साहिब एक महान योद्धा होने के साथ-साथ परोपकार, साहस और मानव सेवा के प्रतीक थे।

इस अवसर पर गुरुद्वारा साहिब में संचालित गुरमुखी सिखलाई (गुरमुखी शिक्षा) कक्षाओं के सफल समापन पर प्रतिभागियों और अध्यापिकाओं को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम में विशेष आकर्षण श्री दरबार साहिब, अमृतसर से पधारे हजूरी रागी भाई वरिंदर सिंह जी रहे। उन्होंने “पंज प्याले पंज पीर, छटम पीर बैठा गुर भारी” शब्द का गायन कर संगत को गुरबाणी का रसपान कराया।

गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा के प्रधान सरदार गुरबक्श सिंह राजन ने प्रकाश पर्व की सभी संगतों को शुभकामनाएं दीं। महासचिव सरदार गुलजार सिंह ने बताया कि 12 जुलाई को सिख सेवक जत्था की ओर से गुरु हरगोबिंद साहिब जी के प्रकाश पर्व को समर्पित विशेष समागम आयोजित किया जाएगा, जिसमें श्री दरबार साहिब, अमृतसर के हजूरी रागी भाई अमनदीप सिंह जी गुरबाणी कीर्तन प्रस्तुत करेंगे।

इस दौरान गुरु महाराज का आशीर्वाद लेने पहुंचे अर्चित डावर को स्मृति चिन्ह एवं शॉल भेंटकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन सरदार दविंदर सिंह भसीन ने किया। उन्होंने आगामी धार्मिक कार्यक्रमों में संगत से सहयोग की अपील भी की।

समापन पर हेड ग्रंथी भाई शमशेर सिंह ने सरबत के भले की अरदास की। इसके पश्चात संगत ने मिस्से परांठे, लस्सी, प्याज और मक्खन के पारंपरिक लंगर का प्रसाद ग्रहण किया।

कार्यक्रम को सफल बनाने में गुरुद्वारा के प्रधान सरदार गुरबक्श सिंह राजन, महासचिव सरदार गुलजार सिंह, वरिष्ठ उपाध्यक्ष जगमिंदर सिंह छाबड़ा, उपाध्यक्ष चरणजीत सिंह चन्नी, मनजीत सिंह, कोषाध्यक्ष दविंदर सिंह भसीन, सतनाम सिंह, दलबीर सिंह कलेर, मनोहर सिंह, अरविंदर सिंह सहित गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के सदस्यों एवं स्वयंसेवकों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

 

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