वन विकास निगम में वित्तीय अनियमितता के आरोप, एमडी ने दिए जांच के आदेश
Dehradun, 24 October: उत्तराखण्ड वन विकास निगम में कुक और खलासी की नियुक्तियों से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितता का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बताया जा रहा है कि इन नियुक्तियों में लगभग दो करोड़ रुपये की हानि का आरोप सामने आया है।
निगम की प्रबंध निदेशक नीना ग्रेवाल ने बुधवार को कहा कि मामले की संपूर्ण जांच कराई जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी भी स्तर पर गड़बड़ी पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
एमडी ग्रेवाल ने बताया कि निगम में कार्य की आवश्यकता के अनुसार कुक और खलासी को दैनिक अथवा बाह्य सेवा के माध्यम से सेवायोजित किया जाता है। यह व्यवस्था उत्तर प्रदेश वन निगम सेवा नियमावली के अंतर्गत मई 2022 तक लागू थी। उस अवधि में इन पदों के लिए निर्धारित मानक भी तय थे।
उन्होंने कहा कि वर्तमान में यह प्रक्रिया विभागीय आवश्यकताओं और प्रतिबंधों को ध्यान में रखकर संचालित की जा रही है। उत्तराखण्ड वन विकास निगम (संशोधित) अधिनियम, 2011 के तहत प्रबंध निदेशक को अस्थायी कर्मियों की नियुक्ति का अधिकार प्राप्त है।
ग्रेवाल ने दोहराया कि निगम की सभी नियुक्तियाँ नियमों के अनुरूप की गई हैं, फिर भी पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जांच की जाएगी। उन्होंने कहा यदि किसी भी स्तर पर वित्तीय अनियमितता पाई गई, तो दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।
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