Rain Alert | स्कूल बंद का आदेश, निजी स्कूल बेपरवाह

देहरादून में भारी बारिश/बर्फबारी का अलर्ट, 27 जनवरी को स्कूल–आंगनबाड़ी बंद

देहरादून में भारी बारिश/बर्फबारी का अलर्ट, 27 जनवरी को स्कूल–आंगनबाड़ी बंद

आदेश लागू, लेकिन निजी स्कूल बेपरवाह

Dehradun, 26 January: भारत मौसम विज्ञान विभाग, देहरादून एवं नेशनल डिजास्टर अलर्ट पोर्टल द्वारा जारी ताज़ा मौसम पूर्वानुमान के अनुसार जनपद देहरादून में 27 जनवरी 2026 को भारी वर्षा, ओलावृष्टि, तेज़ हवाओं और ऊँचाई वाले क्षेत्रों में मध्यम से भारी हिमपात की संभावना जताई गई है। इसके चलते जिले में जन-जीवन प्रभावित होने की आशंका है।

मौसम विभाग के अलर्ट को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियातन बड़ा फैसला लिया है। आपदा न्यूनीकरण के दृष्टिगत जनपद देहरादून के कक्षा 1 से 12 तक संचालित सभी शासकीय, गैर-शासकीय, निजी विद्यालयों एवं सभी आंगनबाड़ी केंद्रों में 27 जनवरी 2026 को एक दिवसीय अवकाश घोषित किया गया है।

बारिश अलर्ट के चलते डीएम के आदेश पर जिले में स्कूल बंद घोषित किए गए
बारिश अलर्ट के चलते डीएम के आदेश पर जिले में स्कूल बंद घोषित किए गए

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आदेशानुसार यह निर्णय संभावित दुर्घटनाओं, ठंड, फिसलन, भूस्खलन एवं यातायात अवरोध जैसी स्थितियों से बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लिया गया है। प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश भी दिए हैं।

मुख्य शिक्षा अधिकारी एवं जिला कार्यक्रम अधिकारी देहरादून को निर्देशित किया गया है कि वे सभी शैक्षणिक संस्थानों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों में इस आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराएं। प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।

आदेश काग़ज़ों में, नाफरमानी ज़मीन पर

बार-बार ऐसे प्रशासनिक आदेश सामने आते हैं, जिनमें आपदा, मौसम या आपात स्थिति के चलते सभी शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने के स्पष्ट निर्देश दिए जाते हैं। जिला मजिस्ट्रेट जैसे संवैधानिक पदों से जारी आदेश सभी सरकारी, गैर-सरकारी और निजी संस्थानों पर समान रूप से लागू होते हैं। लेकिन ज़मीनी सच्चाई यह है कि कई निजी स्कूल इन आदेशों को ‘सलाह’ समझकर नज़रअंदाज़ कर देते हैं। स्कूल बंद घोषित होने के बावजूद स्टाफ को बुलाया जाता है, उपस्थिति बनवाई जाती है, मीटिंग्स करवाई जाती हैं और दबाव के ज़रिए कर्मचारियों को स्कूल आने पर मजबूर किया जाता है।

यह सिर्फ़ प्रशासनिक आदेश की अवहेलना नहीं, बल्कि कानूनी व्यवस्था, संवैधानिक अधिकार और आपदा प्रबंधन प्रणाली का खुला मज़ाक है। सवाल यह नहीं कि आदेश आया या नहीं — सवाल यह है कि क्या आदेश निजी संस्थानों पर लागू नहीं होते? अगर डीएम का आदेश सबके लिए है, तो निजी स्कूलों के लिए अलग सिस्टम क्यों? और अगर नियम सबके लिए एक हैं, तो नाफरमानी करने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं?

यह सिर्फ़ आदेशों की अवहेलना नहीं, यह सिस्टम के प्रति अविश्वास पैदा करने वाली मानसिकता है, जहाँ ताकतवर संस्थान कानून से ऊपर खड़े नज़र आते हैं।

 

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Chief Editor

Ravi Priyanshu

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