पहाड़ों से अवसर के केंद्रों तक: ‘देवभूमि उद्यमिता योजना’ से बदल रही युवाओं की दिशा
Dehradun, 21 October: उत्तराखंड के पहाड़ अब पलायन नहीं, बल्कि अवसर और आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रहे हैं। राज्य सरकार की ‘देवभूमि उद्यमिता योजना (DUY)’ ने युवाओं में रोजगार की तलाश से आगे बढ़कर रोजगार सृजन की सोच जगाई है।
भीमताल के युवा पंकज पांडे कभी पारिवारिक मधुमक्खी पालन से घर चलाने में संघर्ष कर रहे थे। लेकिन डीयूवाई के तहत आयोजित दो दिवसीय बूट कैंप और बाद में 12-दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम (EDP) ने उनकी सोच को नया मोड़ दिया। मेंटर्स के सहयोग से उन्होंने ‘पर्व हनी (Parv Honey)’ नाम से अपना ब्रांड लॉन्च किया। डीयूवाई से मिली ₹75,000 की सीड फंडिंग के बल पर उन्होंने एक वर्ष में ₹5 लाख का कारोबार किया और अब 2028 तक ₹25 लाख के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं।
इसी तरह टिहरी की ज़ैनब सिद्दीकी ने जंगलों की आग की समस्या को अवसर में बदला। उन्होंने ‘इको नेक्सस इनोवेशन प्राइवेट लिमिटेड’ की स्थापना की, जो सूखी चीड़ की पत्तियों से कंपोज़िट बोर्ड बनाती है। इस विचार को मज़बूती देने के लिए उन्हें डीयूवाई से ₹75,000, हीरो मोटोकॉर्प के CSR फंड से ₹1 लाख और आईआईएम काशीपुर से ₹5 लाख का सहयोग मिला। उनका उद्यम आज पर्यावरण और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए एक मिसाल है।

देहरादून के मालदेवता निवासी प्रिंस मंडल ने भी डीयूवाई के मार्गदर्शन में नया रास्ता चुना। पहले वे वेंडिंग मशीन बनाना चाहते थे, पर मेंटर्स के सुझाव पर उन्होंने ‘इमोजीज़ कैफ़े’ की शुरुआत की — जहाँ वे 21 दिन तक ताज़ा रहने वाले ग्लास कपकेक तैयार करते हैं। उन्हें ₹75,000 की सहायता मिली और अब वे ज़ीरो-वेस्ट किचन मॉडल और सोलर प्रोसेसिंग तकनीक से इसे ग्रीन स्टार्टअप में बदल रहे हैं।
सितंबर 2023 में शुरू हुई देवभूमि उद्यमिता योजना (DUY) ने अब तक राज्य के 124 कॉलेज परिसरों में ‘देवभूमि उद्यमिता केंद्र’ स्थापित किए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से 14,260 विद्यार्थियों को उद्यमिता के प्रति जागरूक किया गया है, जबकि 8,901 युवाओं को न्यू एंटरप्राइज़ क्रिएशन और एंटरप्राइज़ स्केलिंग अप जैसे विषयों पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया है। योजना को भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (EDII), अहमदाबाद के सहयोग से लागू किया गया है।
यह पहल न केवल युवाओं में स्वरोज़गार की भावना को सशक्त बना रही है, बल्कि पहाड़ों को पलायन मुक्त बनाते हुए स्थानीय अर्थव्यवस्था की नई पहचान गढ़ रही है। अब उत्तराखंड के गाँवों में युवाओं की मेहनत और नवाचार की चमक दिखाई देने लगी है — जो आने वाले वर्षों में ‘स्टार्टअप देवभूमि’ का सपना साकार कर रही है।

