वैली ऑफ वर्ड्स 2025 का भव्य समापन, साहित्यकारों को मिला सम्मान
Dehradun, 26 October: देहरादून की शांत, धुंधली सुबह जब शब्दों की रोशनी से जगमगाई, तब वैली ऑफ वर्ड्स (VoW) के नौवें संस्करण ने अपनी अंतिम साँसों में भी रचनात्मकता की महक भर दी। दो दिनों तक फैला यह उत्सव मानो एक जीवंत पुस्तक की तरह खुलता गया, हर सत्र एक नया अध्याय, हर संवाद एक नया विचार। कहीं सितार और तबले की गूँज थी, तो कहीं शब्दों के बीच सृजन का उजाला।
समापन दिवस का मुख्य आकर्षण रहा आरईसी वैली ऑफ वर्ड्स पुस्तक सम्मान 2025, जिसमें साहित्य, अनुवाद, बाल साहित्य और रंगमंच के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले रचनाकारों को सम्मानित किया गया। समारोह का संचालन अनूप नौटियाल ने किया, जबकि आरईसी के कार्यकारी निदेशक प्रदीप फेलोज़ और उत्सव निदेशक डॉ. संजीव चोपड़ा की उपस्थिति ने आयोजन को गरिमा प्रदान की। इस अवसर पर हिम ज्योति विद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत नाट्य मंचन ‘इति नाट्य’ ने दर्शकों की भरपूर सराहना पाई।

संगीत और विचारों से सजी सुबह
दूसरे दिन की शुरुआत आईटीसी संगीत सत्र से हुई, जहाँ सितार और तबले की जुगलबंदी ने राग असावरी और भैरवी की मधुरता से वातावरण को सुरभित कर दिया। इसके बाद दून पुस्तकालय और डीआईटी विश्वविद्यालय के सहयोग से उत्तराखंड के अतीत, संस्कृति और पर्यावरणीय चुनौतियों पर एक गंभीर विमर्श हुआ।
साहित्य, समाज और संवाद की विविध झलकें
शब्द हॉल में बच्चों के लिए आयोजित सत्र में कहानी ‘कैक्टस चाहता है गले लगना’ ने दया और दोस्ती के मानवीय संदेश को जीवंत किया। वहीं शब्दावली सभागार में ‘भारत–कोरिया: मानवीय सहयोग से रणनीतिक साझेदारी तक’ विषय पर हुई चर्चा ने अंतरराष्ट्रीय संबंधों की नई दृष्टि प्रस्तुत की।
मुख्य मंच पर लेखक करण माधोक की कृति ‘आनंद – भारत में भांग की परंपरा और विरोधाभास’ पर सार्थक संवाद हुआ, जबकि लेखिका सोनी पांडेय की प्रस्तुति ‘सुनो कबीर’ ने हिंदी कथा साहित्य में समाज, लिंग और आस्था की परतों को उजागर किया।

स्थायित्व, मीडिया और संवेदना पर चर्चाएँ
आर.एस. टोलिया मंच के अंतर्गत ‘स्थानीय सोच, वैश्विक दृष्टि: भविष्य के पर्वतीय नगर’ विषय पर विशेषज्ञों ने पर्यावरण और विकास के संतुलन पर विचार साझा किए। वहीं ‘मीडिया का बदलता चेहरा’ सत्र में कविता उपाध्याय, राहुल कोटियाल और हर्ष दोभाल ने उत्तराखंड की पत्रकारिता के नए आयामों पर चर्चा की।
शाम को ‘अंतिम भिखारी: दान से गरिमा तक’ सत्र में समाज के हाशिए पर खड़े लोगों को सशक्त बनाने के प्रयासों पर संवाद हुआ। ‘जल’ विषयक चर्चा में पर्यावरणविदों ने देहरादून की नदियों और जलस्रोतों के पुनर्जीवन पर सुझाव रखे। साथ ही ‘कहानियाँ क्यों ज़रूरी हैं’ सत्र में लेखिकाओं मोना वर्मा, बिजोया सवियान और सोनिका सेठी ने कहानी कहने की शक्ति और उसके सामाजिक प्रभाव पर विचार व्यक्त किए। दो दिनों के इस आयोजन में सौ से अधिक वक्ताओं, दर्जनों संस्थानों और हजारों दर्शकों की भागीदारी रही।
वैली ऑफ वर्ड्स पुस्तक सम्मान 2025

देहरादून में संपन्न नौवें वैली ऑफ वर्ड्स साहित्य एवं कला महोत्सव में वर्ष 2025 के पुस्तक सम्मान घोषित किए गए। इन सम्मानों के माध्यम से हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषाओं में सृजनशीलता, अनुवाद, बाल साहित्य और युवा लेखन को प्रोत्साहन दिया गया।
| श्रेणी | पुस्तक का नाम | लेखक / अनुवादक | प्रकाशक |
|---|---|---|---|
| अंग्रेज़ी ग़ैर-कथा | Ananda: An Exploration of Cannabis in India | करण माधोक | एलेफ़ |
| अंग्रेज़ी कथा | Swallowing the Sun | लक्ष्मी मुर्देश्वर पुरी | एलेफ़ |
| अंग्रेज़ी अनुवाद | Lavanyadevi (हिंदी) | बनिब्रत महांता | ओरिएंट ब्लैकस्वान |
| हिंदी ग़ैर-कथा | बिदाय दे मा! | सुधीर विद्यार्थी | राजपाल |
| हिंदी कथा | सुनो कबीर | सोनी पांडेय | लोकभारती |
| हिंदी अनुवाद | बहत्तर मील (मराठी) | सुलभा कोरे | राधाकृष्ण |
| युवा साहित्य | Art is a Voice | कृपा | आर्ट्स इंटीग्रेटेड |
| बाल साहित्य | Cactus Wants a Hug | नील फ्लोरी | हैचेट |
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