हिमालयन कल्चरल सेंटर में 21 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने ‘विरासत साधना’ के तहत दिखाई संगीत प्रतिभा, यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के सीएमडी भूपेश सुशील राहुल ने किया सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ
देहरादून | 29 अक्टूबर, 2026
गढ़ी कैंट के निंबूवाला स्थित हिमालयन कल्चरल सेंटर में आयोजित रीच संस्था के विरासत महोत्सव में गुरुवार की शाम भारतीय शास्त्रीय संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं के नाम रही। एक ओर 21 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने ‘विरासत साधना’ के मंच पर अपनी संगीत प्रतिभा का प्रदर्शन किया, वहीं दूसरी ओर प्रख्यात शास्त्रीय गायक सिद्धार्थ बेलमन्नू और विख्यात वीणा वादक राजहेश वैद्य की प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। झमाझम बारिश के बीच सजी इस संगीत संध्या में सुर, ताल और भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिला।
दीप प्रज्वलन के साथ सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ
विरासत महोत्सव की सांस्कृतिक संध्या का विधिवत शुभारंभ यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक भूपेश सुशील राहुल ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय कला, संगीत और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित इस आयोजन में सहभागिता की। दीप प्रज्वलन के बाद मंच पर संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का सिलसिला शुरू हुआ।
21 विद्यालयों के विद्यार्थियों ने ‘विरासत साधना’ में दिखाई प्रतिभा
महोत्सव के अंतर्गत आयोजित ‘विरासत साधना’ में विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक हिस्सा लिया। इस दौरान बच्चों ने बांसुरी, सितार, वायलिन, तबला, पखावज सहित विभिन्न वाद्ययंत्रों पर अपनी प्रस्तुतियां दीं। वहीं, गायन प्रस्तुतियों के माध्यम से भी विद्यार्थियों ने श्रोताओं की खूब सराहना बटोरी।
कार्यक्रम में माउंट लिटेरा ज़ी स्कूल, दून इंटरनेशनल स्कूल सिटी कैंपस, ज्ञानंदा स्कूल फॉर गर्ल्स, माउंट फोर्ट एकेडमी, ग्ली म्यूजिक एकेडमी, द टोंसब्रिज स्कूल, गुरु स्मृति संगीत शिक्षा केंद्र, पीवाईडीएस लर्निंग एकेडमी, वेलहम बॉयज़ स्कूल, घुंघरू कथक संगीत महाविद्यालय, फ्लाईफोट पब्लिक स्कूल, सरगम कला केंद्र, होपटाउन गर्ल्स स्कूल, हेरिटेज नॉर्थ कैंपस, तरुण संगीत एवं नृत्य मंच, द एशियन स्कूल, सुरेंद्र संगीत विद्यालय समिति, सेंट कबीर अकादमी देहरादून और द ओबेरॉय स्कूल ऑफ इंटीग्रेटेड स्टडीज़ (ओएसआईएस) सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों ने भाग लिया।
‘विरासत साधना’ का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ना तथा उभरती प्रतिभाओं को अपनी कला प्रदर्शित करने के लिए मंच उपलब्ध कराना है। विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों में दिखा उत्साह इस पहल की सार्थकता को दर्शाता नजर आया।
सिद्धार्थ बेलमन्नू की शास्त्रीय गायकी ने बांधा समां
सांस्कृतिक संध्या का प्रमुख आकर्षण प्रख्यात भारतीय शास्त्रीय गायक सिद्धार्थ बेलमन्नू की प्रस्तुति रही। उन्होंने अपनी सधी हुई आवाज, सुरों की शुद्धता और रागों की भावपूर्ण अभिव्यक्ति से श्रोताओं को शास्त्रीय संगीत की गहराइयों से परिचित कराया।
प्रस्तुति से पहले उन्होंने मंच से राग का परिचय दिया और इसके बाद अपनी गायकी से संगीत प्रेमियों को सुरों की एक खूबसूरत यात्रा पर ले गए। उनके साथ तबले पर शुभ महाराज और हारमोनियम पर जाकिर ढोलपुरी ने संगत की। दोनों कलाकारों की सधी हुई संगत ने प्रस्तुति में चार चांद लगा दिए।
कर्नाटक के उडुपी जिले के कारकाला से ताल्लुक रखने वाले सिद्धार्थ बेलमन्नू ने अपनी संगीत यात्रा की शुरुआत कर्नाटक शास्त्रीय संगीत से की थी। बाद में उन्होंने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत का प्रशिक्षण लिया। उन्होंने प्रसिद्ध संगीतकार पीआर मंजुनाथ के मार्गदर्शन में शिक्षा प्राप्त की और आगे चलकर गायनाचार्य गुरुराव देशपांडे तथा पंडित विनायक तोरवी से प्रशिक्षण हासिल किया। पंडित विनायक तोरवी भारत रत्न पंडित भीमसेन जोशी के शिष्य रहे हैं।
सिद्धार्थ बेलमन्नू ऑल इंडिया रेडियो के ए-ग्रेड कलाकार हैं। उन्हें शन्मुख संगीत शिरोमणि पुरस्कार, हयवदना पुरस्कार और कर्नाटक राज्य पुरस्कार सहित कई सम्मान प्राप्त हो चुके हैं। देश-विदेश के प्रतिष्ठित मंचों पर अपनी प्रस्तुतियों के जरिए उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत में विशिष्ट पहचान बनाई है।
बारिश के बीच राजहेश वैद्य की वीणा ने बिखेरा संगीत का जादू
गुरुवार की शाम का एक और बड़ा आकर्षण प्रख्यात वीणा वादक राजहेश वैद्य की प्रस्तुति रही। बारिश के बीच उनकी वीणा से निकली मधुर धुनों और तेज लयकारी ने महोत्सव की महफिल को संगीतमय बना दिया। उनके वादन में शास्त्रीय संगीत की गहराई के साथ समकालीन अंदाज की झलक भी देखने को मिली।
राजहेश वैद्य के साथ मृदंगम पर मोहन रमन और तबले पर प्रवीण नारायण ने संगत की। वीणा के स्वरों के साथ मृदंगम और तबले की लयकारी ने प्रस्तुति को और प्रभावशाली बनाया। तीनों कलाकारों के बीच सुर और ताल का बेहतरीन तालमेल दर्शकों के लिए विशेष आकर्षण रहा।
संगीत की समृद्ध पारिवारिक विरासत से जुड़े राजहेश वैद्य को वीणा वादन की प्रारंभिक प्रेरणा अपने पिता एवं गुरु के.एम. वैद्यनाथन से मिली। इसके बाद उन्होंने कर्नाटक संगीत के दिग्गज वीणा वादक चिट्टी बाबू के मार्गदर्शन में इस वाद्ययंत्र की बारीकियां सीखीं। वे अपनी संगीत यात्रा में प्रसिद्ध संगीतकार एल. शंकर से भी मार्गदर्शन प्राप्त करते रहे हैं।
अपनी तेज गति, विशिष्ट वादन शैली और इलेक्ट्रिक वीणा पर महारत के लिए पहचाने जाने वाले राजहेश वैद्य ने देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर प्रस्तुतियां दी हैं। प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय संगीत परियोजना ‘प्लेइंग फॉर चेंज’ में उनका योगदान भी उल्लेखनीय रहा है। उनके नाम 50 से अधिक एल्बम दर्ज हैं। उन्हें ‘कलाइमामणि’ और ‘श्री कांची कामकोटी पीठा आस्थाना विद्वान’ जैसी प्रतिष्ठित उपाधियों से सम्मानित किया जा चुका है।
भारतीय सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रयास
विरासत महोत्सव की गुरुवार की शाम ने एक बार फिर भारतीय शास्त्रीय संगीत की विविधता और समृद्धि को सामने रखा। जहां स्थापित कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया, वहीं विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा के माध्यम से भारतीय संगीत की परंपरा को आगे बढ़ाने की उम्मीद जगाई। विरासत साधना जैसे आयोजनों के जरिए नई पीढ़ी को कला और संस्कृति से जोड़ने का प्रयास महोत्सव की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में सामने आया।
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