हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र, नींबूवाला में पहली बार होगा आयोजन; उषा उत्थुप, बेगम परवीन सुल्ताना और इंडियन ओशन समेत कई दिग्गज कलाकार देंगे प्रस्तुति
देहरादून | 21 अक्टूबर, 2026
उत्तराखंड की सांस्कृतिक राजधानी देहरादून में एक बार फिर कला, संगीत, साहित्य और लोक परंपराओं का रंगारंग संगम देखने को मिलेगा। रिच (REACH) संस्था की ओर से आयोजित विरासत आर्ट एंड हेरिटेज फेस्टिवल 2026 का शुभारंभ 23 अक्टूबर से होगा। इस बार महोत्सव का आयोजन राजपुर रोड के बजाय नींबूवाला स्थित हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र के विशाल परिसर में किया जा रहा है। 6 नवंबर तक चलने वाले इस 15 दिवसीय महोत्सव में देश-विदेश के कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।
रिच संस्था के संस्थापक एवं अध्यक्ष आरके सिंह ने राजपुर रोड स्थित एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में महोत्सव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि संस्था का लक्ष्य विरासत महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान दिलाना है। नए आयोजन स्थल का चयन बेहतर व्यवस्थाओं, दर्शकों के अनुभव और यातायात संबंधी परेशानियों को कम करने के उद्देश्य से किया गया है।
छोलिया नृत्य और शास्त्रीय संगीत से होगा आगाज
महोत्सव की शुरुआत उत्तराखंड के पारंपरिक छोलिया नृत्य और उप्रेती बहनों की लोक संगीत प्रस्तुति के साथ होगी। उद्घाटन समारोह में हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत की भी विशेष प्रस्तुति रखी गई है। सुप्रसिद्ध ठुमरी गायक पंडित साजन मिश्रा और स्वरांश मिश्रा अपनी गायकी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगे।
आयोजकों के अनुसार, इस बार हिमालयन सांस्कृतिक केंद्र के ऑडिटोरियम में 29 कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ थिएटर फेस्टिवल भी शुरू किया जाएगा। विरासत विलेज और एम्फीथिएटर में लोक कलाओं, नृत्य और संगीत की विभिन्न प्रस्तुतियां होंगी।
6 नवंबर को उषा उत्थुप की प्रस्तुति के साथ समापन
विरासत महोत्सव का समापन 6 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त गायिका उषा उत्थुप की प्रस्तुति के साथ होगा। इन 15 दिनों के दौरान दर्शकों को भारतीय शास्त्रीय संगीत, सुगम संगीत, सूफी गायन, लोक संगीत, नृत्य और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद लेने का अवसर मिलेगा।
महोत्सव में बेगम परवीन सुल्ताना, टीएम कृष्णा, डॉ. एन. राजम, महेश काले, राहुल देशपांडे, जसबीर जस्सी और ओसमान मीर जैसे प्रतिष्ठित कलाकार भी प्रस्तुति देंगे। इसके अतिरिक्त प्रसिद्ध भारतीय बैंड इंडियन ओशन की प्रस्तुति भी कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण होगी।
वायलिन, सरोद, सितार और वीणा वादन भी होगा खास
शास्त्रीय संगीत के प्रेमियों के लिए इस बार कई विशिष्ट प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। युवा वायलिन वादक रागिनी शंकर वादन करेंगी, जबकि स्मित तिवारी सरोद, अश्विन श्रीनिवासन बांसुरी और ध्रुव बेदी व समन्वय सरकार सितार वादन प्रस्तुत करेंगे।
राजेश वैद्य और रमणा बालचंद्रन वीणा वादन से दर्शकों को भारतीय संगीत की समृद्ध परंपरा से रूबरू कराएंगे। वहीं, प्रियंका बर्वे गजल गायन और सिद्धार्थ बेलमन्नू अपनी गायकी से महोत्सव में रंग भरेंगे।
भारतीय और पश्चिमी संगीत के संगम पर आधारित विशेष कार्यक्रम में वायलिन वादक कुमारेश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध सैक्सोफोन वादक जॉर्ज ब्रूक्स एक साथ प्रस्तुति देंगे।
कथक, भरतनाट्यम और ओडिसी नृत्य की झलक
विरासत महोत्सव में शास्त्रीय नृत्य की विविध परंपराओं को भी प्रमुखता दी जाएगी। शिंजिनी कुलकर्णी कथक प्रस्तुत करेंगी, जबकि आरोही मुंशी भरतनाट्यम, वाणी माधव ओडिसी और मौमाला नायक कथक नृत्य के माध्यम से दर्शकों को भारतीय नृत्य कलाओं की बारीकियों से परिचित कराएंगी।
इसके अलावा ‘बहार-ए-लखनऊ’, ‘चांदनी महफिल’ और ‘तवायफनामा – एक यात्रा’ जैसे विशेष कार्यक्रम भी आयोजित होंगे। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक इतिहास, पारंपरिक कलाओं और तवायफों की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक भूमिका को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा। ग्रामोफोन के 125 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में गौहर जान की स्मृति को समर्पित विशेष कार्यक्रम भी आयोजित होगा।
जौनसारी, गढ़वाली और कुमाऊंनी लोक संस्कृति का प्रदर्शन
उत्तराखंड की लोक संस्कृति महोत्सव का प्रमुख आकर्षण रहेगी। कार्यक्रम में जौनसारी लोक नृत्य, गढ़वाली संगीत और नृत्य तथा कुमाऊंनी लोक प्रस्तुतियां शामिल होंगी।
स्पर्श ट्राइबल सोशल ऑर्गनाइजेशन, जौनसार बावर लोक सुर संगम और जौनसार बावर सांस्कृतिक हिलोयात रंगमंच के कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। आस सोशल एंड कल्चर सोसाइटी कुमाऊंनी लोक संगीत एवं नृत्य प्रस्तुत करेगी। वहीं, सरिता बनोला, महिला जागृति समिति, पांडवानी लोक कला मंच और सुनिधि सहित अन्य कलाकार एवं संस्थाएं भी विभिन्न लोक विधाओं का प्रदर्शन करेंगी।
अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कार्यक्रमों के तहत श्रीलंका के लोक कलाकारों और कजाकिस्तान के कलाकारों की प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी।
साहित्य, मुशायरा और दास्तानगोई के कार्यक्रम
संगीत और नृत्य के साथ विरासत महोत्सव में साहित्यिक गतिविधियों को भी विशेष स्थान दिया गया है। साहित्यिक कार्यक्रमों में लेखक, कवि और विचारक अपनी रचनाओं एवं विचारों को साझा करेंगे। देहरादून की साहित्यिक हस्तियों सहित विभिन्न क्षेत्रों के साहित्यकार इसमें भाग लेंगे।
महोत्सव में दास्तानगोई की पारंपरिक कला को मंच मिलेगा। आस्था शुक्ला, तसनीम सुंद और सैयद साहिल आगा कहानी-वाचन की प्रस्तुतियां देंगे। इसके अलावा शीन काफ निजाम, मदन मोहन दानिश, राजेश रेड्डी, इकबाल अशहर, अजर इकबाल और अन्य शायरों की मौजूदगी में मुशायरा आयोजित होगा।
हिंदी कविता प्रेमियों के लिए कवि सम्मेलन भी होगा, जिसमें विभिन्न कवि अपनी रचनाएं प्रस्तुत करेंगे। साहित्य और अपराध लेखन पर केंद्रित विशेष कार्यक्रम भी महोत्सव का हिस्सा होंगे।
खरीदारी के शौकीनों के लिए भी खास इंतजाम
विरासत महोत्सव केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रहेगा। यहां खरीदारी के शौकीनों के लिए पारंपरिक परिधान, सूखे मेवे, ऊनी उत्पाद, लकड़ी की नक्काशी से बनी वस्तुएं, धातु शिल्प, रजाइयां, फर्नीचर और अन्य हस्तनिर्मित उत्पाद उपलब्ध होंगे।
आयोजकों का कहना है कि नए परिसर में दर्शकों को सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ पारंपरिक शिल्प और विभिन्न क्षेत्रों के उत्पादों को देखने एवं खरीदने का अवसर मिलेगा।
विद्यार्थियों के लिए क्विज, शिल्प गतिविधियां और सांस्कृतिक मंच
महोत्सव के दौरान स्कूली विद्यार्थियों के लिए भी शैक्षिक और रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इनमें ‘शिल्प ट्रेजर हंट’, विरासत हेरिटेज क्विज और ‘विरासत साधना’ प्रमुख हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय कला, सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्प, शास्त्रीय संगीत और नृत्य से जोड़ना है।
इसके अलावा विंटेज कार एवं मोटरसाइकिल रैली, सुपरबाइक रैली और उत्तराखंड की पर्यावरण संबंधी लोक-नाट्य प्रस्तुति भी महोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहेंगी।
विरासत को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का लक्ष्य
आरके सिंह ने कहा कि संस्था विरासत महोत्सव को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने की दिशा में प्रयास कर रही है। उनका कहना है कि नए आयोजन स्थल पर दर्शकों और कलाकारों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ महोत्सव के अनुभव को और व्यापक बनाने की कोशिश की गई है।
पत्रकार वार्ता में रिच संस्था की संयुक्त सचिव विजयश्री जोशी, विरासत महोत्सव के निदेशक लोकेश ओहरी, प्रियंदा अय्यर, रिच के सदस्य आशुतोष, वन विभाग उत्तराखंड से समीर सिन्हा और ओएनजीसी के हेड एचआर नीरज शर्मा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
विरासत आर्ट एंड हेरिटेज फेस्टिवल 2026 देहरादून में 23 अक्टूबर से 6 नवंबर तक कला, संगीत, साहित्य, लोक संस्कृति और पारंपरिक शिल्प का व्यापक मंच बनेगा। आयोजकों को उम्मीद है कि नया परिसर इस वर्ष दर्शकों को एक अलग सांस्कृतिक अनुभव प्रदान करेगा।
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