विरासत महोत्सव: बच्चों ने दिखाई रचनात्मकता, सीखी पारंपरिक कलाएं
Dehradun, 14 October: रीच संस्था द्वारा आयोजित विरासत महोत्सव के तहत मंगलवार का दिन बच्चों की रचनात्मकता और उत्साह के नाम रहा। शहर के विभिन्न स्कूलों से आए 86 बच्चों ने पारंपरिक कलाओं में हिस्सा लेते हुए अपने हुनर का शानदार प्रदर्शन किया।
विभिन्न स्कूलों के विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम में बच्चों ने पारंपरिक शिल्पकारों से सीधे सीखने का अवसर भी पाया, दिल्ली के देवेंद्र चाचा ने मिट्टी के बर्तन बनाना सिखाया, वहीं रामपुर (उत्तर प्रदेश) के शावेज़ मियां ने बच्चों को पतंग बनाने की विधि सिखाई। छोटे कलाकारों ने पूरे उत्साह और जिज्ञासा के साथ इन कलाओं को सीखा और अपनी रचनात्मकता का परिचय दिया। इस मौके पर लतिका विहार के 40, ओलंपस हाई स्कूल के 10, एसजीआरआर पब्लिक स्कूल बालावाला के 16 और लतिका रॉय फाउंडेशन के 20 विद्यार्थियों ने भाग लेकर मिट्टी के बर्तन, पतंग, ब्लॉक प्रिंटिंग, डॉल मेकिंग, ग्लास पेंटिंग और पेपर क्राफ्ट जैसी कलाओं को सीखा।

क्राफ्ट कार्यशाला में दिखा उत्साह
विरासत में आयोजित इस क्राफ्ट कार्यशाला में बच्चों के उत्साह को देखकर दर्शक भी रोमांचित नजर आए। बच्चों ने अपने रंगों, कल्पनाओं और पारंपरिक कलाओं से विरासत के माहौल को जीवंत बना दिया। कार्यक्रम में वॉलंटियर्स नेहा जोशी, अरिहंत और अनुज ने बच्चों के साथ घुल-मिलकर आयोजन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।
रीच संस्था के इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय पारंपरिक कलाओं और संस्कृति से जोड़ना है, जिसे आज बच्चों ने पूरे मनोयोग और उत्साह के साथ आत्मसात किया।
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