नियो मेट्रो की कवायद पर आम आदमी पार्टी ने उठाए सवाल, राज्यपाल के नाम डीएम को सौंपा ज्ञापन; अधिकारियों से बातचीत की कोशिश के दौरान पुलिस से नोकझोंक का दावा
देहरादून | 25 सितंबर, 2026
राजधानी देहरादून की प्रस्तावित सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। नियो मेट्रो परियोजना के बाद अब शहर में एलिवेटेड कॉरिडोर पर लंबी इलेक्ट्रिक बसें चलाने की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर आम आदमी पार्टी ने सरकार से जवाबदेही की मांग की है।
आम आदमी पार्टी देहरादून के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पिछले कई वर्षों में मेट्रो और नियो मेट्रो परियोजनाओं की डीपीआर, सर्वे, कंसल्टेंसी और बैठकों के नाम पर करीब 80 से 90 करोड़ रुपये खर्च किए गए, लेकिन परियोजना अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी। पार्टी ने इस खर्च का पूरा हिसाब सार्वजनिक करने और इसके लिए जवाबदेही तय करने की मांग की है।
हालांकि, उपलब्ध पूर्व प्रकाशित रिपोर्टों में नियो मेट्रो से जुड़ी कवायद पर 80 करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का उल्लेख मिलता है। इसलिए 80-90 करोड़ रुपये के आंकड़े को फिलहाल आम आदमी पार्टी द्वारा लगाए गए आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
नियो मेट्रो के बाद अब ई-बस मॉडल
देहरादून की परिवहन व्यवस्था को लेकर हाल में सामने आए प्रस्ताव के मुताबिक अब नियो मेट्रो के बजाय लगभग 24 मीटर लंबी इलेक्ट्रिक बसों को एलिवेटेड कॉरिडोर पर चलाने की योजना पर विचार किया जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार यह कॉरिडोर शहर की मुख्य सड़कों के बीच डिवाइडर वाले हिस्से में पिलर खड़े कर तैयार किया जाना प्रस्तावित है।
इस बदलाव ने पुराने प्रोजेक्ट पर खर्च और उसकी उपयोगिता को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। AAP का कहना है कि यदि आखिरकार शहर की परिवहन जरूरतों के लिए ई-बस या ई-बीआरटीएस जैसे विकल्पों की ओर जाना था, तो पहले की गई मेट्रो/नियो मेट्रो संबंधी कवायद पर हुए खर्च का हिसाब जनता को दिया जाना चाहिए।
नियो मेट्रो परियोजना को लेकर पहले भी केंद्र स्तर पर आगे बढ़ने में अड़चनें सामने आती रही हैं। मार्च 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रस्तावित परियोजना की डीपीआर और वित्तीय प्रक्रिया लंबे समय से लंबित थी।
राज्यपाल के नाम डीएम को सौंपा ज्ञापन
इन्हीं मुद्दों को लेकर आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने राज्यपाल के नाम जिलाधिकारी देहरादून को ज्ञापन सौंपा। पार्टी ने मेट्रो एवं नियो मेट्रो से संबंधित डीपीआर, सर्वे, कंसल्टेंसी और अन्य मदों में हुए खर्च का विस्तृत ब्यौरा सार्वजनिक करने की मांग की।
AAP ने यह भी सवाल उठाया कि वर्षों तक अलग-अलग प्रस्तावों और सर्वे के बाद अब परिवहन व्यवस्था के लिए नया मॉडल क्यों लाया जा रहा है और पिछली योजनाओं पर हुए खर्च की जवाबदेही किसकी होगी।
अधिकारियों से बातचीत की कोशिश के दौरान पुलिस से नोकझोंक
पार्टी कार्यकर्ताओं के मुताबिक, ज्ञापन देने के बाद जब उन्होंने संबंधित अधिकारियों से इन मुद्दों पर बातचीत करने की कोशिश की तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।
इसके बाद AAP कार्यकर्ताओं ने विरोध दर्ज कराते हुए डीएम कार्यालय परिसर में ही धरना शुरू कर दिया। कार्यकर्ताओं ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मेट्रो परियोजना पर हुए खर्च का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग दोहराई।
परिवहन व्यवस्था पर बड़ा सवाल
देहरादून में बढ़ते यातायात दबाव के बीच शहर के लिए प्रभावी और टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है। ऐसे में मेट्रो, नियो मेट्रो और अब एलिवेटेड कॉरिडोर पर इलेक्ट्रिक बसों के प्रस्ताव के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर शहर के लिए कौन-सी परिवहन व्यवस्था अंतिम रूप से लागू होगी और अब तक की गई कवायद पर खर्च हुए सार्वजनिक धन का क्या हिसाब होगा।
AAP के आरोपों और मांगों पर संबंधित विभाग या सरकार की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।








