उत्तराखण्ड आन्दोलनकारियों के चिन्हीकरण को लेकर डीएम कार्यालय में बड़ा प्रदर्शन, जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा

Dehradu, 10 July 2026 : उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन में योगदान देने वाले उन कार्यकर्ताओं के चिन्हीकरण की मांग को लेकर, जो विभिन्न कारणों से प्रक्रिया से वंचित रह गए हैं, आज उत्तराखण्ड आन्दोलनकारी संयुक्त परिषद के नेतृत्व में जिलाधिकारी कार्यालय के समक्ष बड़ा एवं प्रभावी प्रदर्शन हुआ। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जिलाधिकारी के नाम अपर सिटी मजिस्ट्रेट को एक औपचारिक ज्ञापन (पत्र) सौंपकर अपनी मांगों को शीघ्र निपटाने की माँग की उन्होंने आवश्यक कार्यवाही का आश्वासन दिया

क्या रखीं मुख्य माँगें?

प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन के माध्यम से तीन प्रमुख माँगें रखीं:

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1. छूटे हुए आन्दोलनकारियों का तत्काल चिन्हीकरण किया जाए, जिन्हें प्रमाणों के अभाव या जटिल प्रक्रिया के कारण उपेक्षित कर दिया गया।
2. चिन्हीकरण के मापदण्डों को सरल, पारदर्शी और तर्कसंगत बनाया जाए ताकि सामान्य कार्यकर्ता इस प्रक्रिया का लाभ उठा सकें।
3. पेपर कटिंग (समकालीन समाचार-पत्रों की कतरनें) तथा वरिष्ठ आन्दोलनकारियों की संस्तुति को प्रमाणिकता में प्राथमिकता दी जाए, क्योंकि उस समय कई कार्यकर्ताओं के पास औपचारिक दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं थे।

इन नेताओं ने किया नेतृत्व,बडी संख्या में कार्यकर्ता हुए शामिल
प्रदर्शन की अगुवाई करते हुए परिषद के संरक्षक नवनीत गुंसाई, सीपीएम सचिव अनन्त आकाश, जिलाध्यक्ष सुरेश कुमार, वरिष्ठ आन्दोलनकारी प्रभात डण्डरियाल, अम्बुज शर्मा, लेखराज,अमित परमार,राजेश शर्मा, विकास रावत, दुर्गा ध्यानी, मीरा गुंसाई, देवेश्वरीकाला उपस्थित रहे। इस अवसर पर चिन्हीकरण से वंचित सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने एकजुटता दिखाई।
प्रदर्शन में शामिल प्रमुख कार्यकर्ताओं में उमेश चन्द, सुशील बिरमानी, चिन्तन डण्डरियाल, पुष्पलता वैश्य, गीता नेगी, यशोदा नेगी, नुरैशा, उषा शर्मा, बृजमोहन भट्ट, रामफल, क्यारा देवी, कल्पेश्वरी, एकाशी, भगवन्त पयाल, अभिषेक, मनमोहन, रवि,गीता बिष्ट, सुमित्रा देवी, रामदुलारी, शीला देवी जखमोला, गौरा देवी, शान्ति रावत, सीता देवी, शाकुम्बरी रावत, सुशीला देवी, राजेश्वरी, कल्पेश्वरी, सर्वैश्वरी बहुगुणा, सुरेशी नेगी, शान्ता उनियाल, मुकेश मोधा, इन्द्रा देवी, जमुना देवी, गंगा थापा, इन्द्रदत्त बहुगुणा, गुरु प्रसाद सहित अन्य बड़ी संख्या में आन्दोलनकारी शामिल थे। सभी ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

प्रशासन ने क्या कहा?

प्रदर्शनकारियों ने औपचारिक ज्ञापन अपर सिटी मजिस्ट्रेट महोदय ने ज्ञापन स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया कि इस मामले को जिलाधिकारी के समक्ष रखा जाएगा तथा अपने स्तर से आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। हालाँकि, प्रदर्शनकारी नेताओं ने असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि पिछली कई बार केवल आश्वासन पर ही कार्यवाही रोक दी गई, जबकि ठोस हल नहीं निकला।

पूर्व की कार्यवाहियाँ: कैसा रहा है आन्दोलन का इतिहास?

यह मुद्दा नया नहीं है। आन्दोलनकारियों ने अपने ज्ञापन में पूर्व की कार्यवाहियों का भी हवाला दिया:

· 2023 में आन्दोलनकारियों ने सचिवालय कूच कर शासन को ज्ञापन दिया था।
· 2024 में विभिन्न संगठनों ने डीएम को ज्ञापन देकर प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग की थी।
· 2025 में कई जिलों में धरने-प्रदर्शन हुए, लेकिन प्रशासन ने मापदण्डों में कोई ढील नहीं दी।
· जनवरी 2026 में परिषद ने स्पष्ट चेतावनी दे दी थी कि बिना कार्यवाही के व्यापक आन्दोलन किया जाएगा।

आन्दोलनकारियों का आरोप है कि प्रदेश के 13 जिलों में चिन्हीकरण प्रक्रिया ठप पड़ी है और प्रशासन द्वारा जानबूझकर पात्र लोगों को वंचित रखा जा रहा है।

अल्टीमेटम: ‘एक सप्ताह में नहीं मानी मांग तो होगा व्यापक आन्दोलन’

ज्ञापन सौंपने के बाद परिषद के नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर माँगों पर सम्मानजनक एवं ठोस हल नहीं निकाला गया, तो संयुक्त परिषद व्यापक आन्दोलन करने के लिए विवश होगी। उन्होंने कहा कि जब तक सभी पात्र आन्दोलनकारियों का उचित चिन्हीकरण नहीं होता, यह आन्दोलन जारी रहेगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इस दौरान मौके पर मौजूद कार्यकर्ताओं ने नारे लगाकर इस चेतावनी का समर्थन किया।

The India Vox

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Ravi Priyanshu

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