उत्तराखंड में अप्रैल 2026 से शुरू होगा वर्चुअल रजिस्ट्रेशन सिस्टम
जमीन खरीद-फरोख्त में बढ़ेगी पारदर्शिता
Dehradun, 12 November: उत्तराखंड सरकार ने जमीनों की रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य में अब वर्चुअल रजिस्ट्रेशन सिस्टम लागू किया जाएगा, जो आगामी एक अप्रैल 2026 से पूरे प्रदेश में प्रभावी हो जाएगा। इससे रजिस्ट्री प्रक्रिया तेज़, सुरक्षित और बिचौलियों से मुक्त होगी।
मंगलवार को मुख्य सचिव आनंद बर्धन की अध्यक्षता में सचिवालय में इस परियोजना को लेकर उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि वर्चुअल सिस्टम लागू होने से न केवल आमजन को सुविधा मिलेगी, बल्कि जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े विवादों में भी कमी आएगी। उन्होंने इस प्रोजेक्ट को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।
मुख्य सचिव ने कहा कि यह प्रणाली भूमि संबंधी सभी विभागों के बीच डेटा साझा करने की प्रक्रिया को स्वतः और पेपरलेस बनाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि नया पोर्टल ऐसा होना चाहिए जिसमें भूमि रिकॉर्ड, दस्तावेज़ और स्वीकृतियाँ सुरक्षित रूप से एकीकृत रूप में उपलब्ध हों, ताकि भविष्य में किसी स्तर पर दोहराव या विवाद की स्थिति न बने।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस प्रणाली के लागू होने से सभी विभागों के पास एक समान और अद्यतन भूमि रिकॉर्ड उपलब्ध होगा, जिससे पारदर्शिता के साथ-साथ प्रशासनिक दक्षता में भी सुधार होगा।
एप्लीकेशन तैयार, अंतिम सुधार जारी
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि वर्चुअल रजिस्ट्रेशन सिस्टम का एप्लीकेशन लगभग तैयार है। कुछ आवश्यक तकनीकी सुधारों के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा, जिसके बाद इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी टेंडर प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
नए पोर्टल में नागरिकों को तीन विकल्प मिलेंगे —
- पारंपरिक तरीका: दस्तावेज़ों के साथ रजिस्ट्रार कार्यालय जाकर रजिस्ट्री।
- पेपरलेस प्रक्रिया: रजिस्ट्रार कार्यालय में पूरी तरह डिजिटल माध्यम से रजिस्ट्री।
- वर्चुअल रजिस्ट्रेशन: घर बैठे ऑनलाइन रजिस्ट्री की सुविधा, बिना किसी बिचौलिए के।
अधिकारियों का मानना है कि इस पहल से उत्तराखंड देश के उन अग्रणी राज्यों में शामिल होगा जो भूमि रजिस्ट्री प्रणाली को पूरी तरह वर्चुअल और पारदर्शी बना चुके हैं।

