16 दिन में क्षतिग्रस्त हुआ ₹17 करोड़ का पुल, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

12 जुलाई 2026 को शुरू हुआ नंदा की चौकी–प्रेमनगर मार्ग का नया पुल भारी बारिश के बाद क्षतिग्रस्त होने से निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठे।

महीनेभर नहीं टिका ₹17 करोड़ का पुल! पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

Dehradun | July 28, 2026

देहरादून की चकराता रोड पर नंदा की चौकी से प्रेमनगर (टौंस नदी) मार्ग पर हाल ही में तैयार किया गया नया स्थायी पुल पहली ही तेज बारिश के बाद क्षतिग्रस्त हो गया। करीब ₹17 करोड़ की लागत से बने इस पुल को 12 जुलाई 2026 को आम जनता की आवाजाही के लिए खोला गया था। अब, उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद सामने आई इस घटना ने निर्माण गुणवत्ता, तकनीकी निगरानी और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मार्च 2026 में शुरू हुआ पुनर्निर्माण, 12 जुलाई को खोला गया नया पुल
मार्च 2026 में शुरू हुआ पुनर्निर्माण, 12 जुलाई को खोला गया नया पुल

एप्रोच रोड धंसने से बढ़ी चिंता

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो और तस्वीरों में पुल के एप्रोच मार्ग का एक हिस्सा बुरी तरह धंसा हुआ दिखाई दे रहा है। इससे इस महत्वपूर्ण मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ है। यह सड़क देहरादून, प्रेमनगर और विकासनगर की ओर आने-जाने वाले हजारों लोगों के लिए अहम संपर्क मार्ग मानी जाती है।

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12 जुलाई को शुरू हुआ था आवागमन

पिछले वर्ष पुराने पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद इस नए स्थायी पुल का निर्माण कराया गया था। 12 जुलाई 2026 को इसे जनता के लिए खोला गया था। स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि नया पुल लंबे समय तक सुरक्षित और सुगम आवागमन सुनिश्चित करेगा, लेकिन पहली ही तेज बारिश के बाद हुए नुकसान ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

करीब ₹17 करोड़ की लागत से बने इस पुल के 16 दिनों में ही क्षतिग्रस्त होने की खबर सामने आने के बाद स्थानीय लोग निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि नुकसान का सटीक कारण क्या है। इसकी पुष्टि तकनीकी जांच के बाद ही हो सकेगी।

जनहित से जुड़े बड़े सवाल

  • क्या पुल और एप्रोच रोड का निर्माण तय मानकों के अनुसार हुआ था?
  • क्या बारिश के पानी की निकासी (ड्रेनेज) की पर्याप्त व्यवस्था थी?
  • क्या निर्माण कार्य की गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाएगी?
  • यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

प्रशासन से क्या उम्मीद?

जनहित को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि संबंधित विभाग को जल्द से जल्द तकनीकी टीम भेजकर नुकसान के कारणों की जांच करनी चाहिए। साथ ही जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि क्षति किन कारणों से हुई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।

The India Vox की अपील

यह मुद्दा केवल एक पुल का नहीं, बल्कि हजारों लोगों की सुरक्षा से जुड़ा है। किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक जांच रिपोर्ट का इंतजार जरूरी है। वहीं, यदि कहीं लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ पारदर्शी कार्रवाई भी उतनी ही जरूरी है।

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The India Vox

The India Vox Editorial Team उत्तराखंड, राष्ट्रीय, शिक्षा, रोजगार, पर्यटन, स्वास्थ्य और जनहित से जुड़े विषयों पर तथ्यात्मक एवं निष्पक्ष समाचार प्रकाशित करता है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों और आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर पाठकों तक सटीक जानकारी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

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Chief Editor

Ravi Priyanshu

Ravi Priyanshu is a journalist, novelist, and Founder & Editor-in-Chief of The India Vox. With 23+ years of experience, he is dedicated to credible journalism and meaningful storytelling.

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