विदेश में पढ़ाई के लिए सिर्फ देश की रैंकिंग नहीं, बल्कि शहर की सुरक्षा, छात्र सहायता, वीजा नियम, स्वास्थ्य सुविधाएं और स्थानीय परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण; 2025 Global Peace Index में आयरलैंड और न्यूजीलैंड शीर्ष देशों में शामिल
The India Vox Desk
New Delhi | June 20, 2026
विदेश में उच्च शिक्षा हासिल करना आज हजारों भारतीय छात्रों का लक्ष्य है। अमेरिका, कनाडा, जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड और न्यूजीलैंड जैसे देश भारतीय विद्यार्थियों के प्रमुख अध्ययन गंतव्यों में शामिल हैं। लेकिन विदेश में पढ़ाई का फैसला लेते समय केवल विश्वविद्यालय की रैंकिंग, फीस या रोजगार के अवसर देखना पर्याप्त नहीं है। छात्रों और अभिभावकों के लिए सुरक्षा, स्थानीय कानून, स्वास्थ्य सुविधाएं, आवास, छात्र सहायता और वीजा नियम भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
ऐसे में सवाल यह नहीं होना चाहिए कि “भारतीय छात्रों के लिए दुनिया का सबसे सुरक्षित देश कौन सा है?” बल्कि यह देखना जरूरी है कि अलग-अलग देशों में सुरक्षा और छात्र सहायता से जुड़े कौन-कौन से पहलू उपलब्ध हैं।
Global Peace Index में आयरलैंड और न्यूजीलैंड की स्थिति
2025 के Global Peace Index (GPI) में आयरलैंड दूसरे और न्यूजीलैंड तीसरे स्थान पर रहे। इसी रिपोर्ट में ऑस्ट्रेलिया 18वें और जर्मनी 20वें स्थान पर था। हालांकि, यह रिपोर्ट किसी देश को विशेष रूप से “भारतीय छात्रों के लिए सबसे सुरक्षित” घोषित नहीं करती। यह देशों में शांति और सुरक्षा की व्यापक स्थिति को मापती है।
इसलिए विदेश में पढ़ाई के लिए देश चुनते समय GPI जैसी अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट को केवल एक संकेतक के तौर पर देखना चाहिए।
न्यूजीलैंड: सुरक्षा और छात्र सहायता पर जोर
न्यूजीलैंड 2025 Global Peace Index में तीसरे स्थान पर रहा। GPI के Societal Safety and Security domain में भी न्यूजीलैंड अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में था।
भारतीय छात्रों के लिए किसी देश की सुरक्षा समझने के साथ-साथ यह देखना भी जरूरी है कि संबंधित विश्वविद्यालय में international students के लिए accommodation, emergency assistance और student support जैसी सुविधाएं कैसी हैं।

आयरलैंड: अच्छी वैश्विक सुरक्षा स्थिति, लेकिन स्थानीय सावधानी जरूरी
आयरलैंड 2025 Global Peace Index में दूसरे स्थान पर रहा। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि वहां हर शहर या हर परिस्थिति में अपराध का जोखिम शून्य है। भारतीय दूतावास, डबलिन ने भारतीय नागरिकों को कुछ इलाकों में burglary और mugging की घटनाओं को लेकर सामान्य सावधानी बरतने की सलाह दी है, खासकर रात में अकेले यात्रा करने वाले छात्रों के लिए। इसलिए छात्रों को देश के साथ-साथ अपने शहर, विश्वविद्यालय और रहने वाले इलाके की स्थिति भी जांचनी चाहिए।

जर्मनी: शिक्षा के साथ सुरक्षा और स्थानीय नियमों की जानकारी जरूरी
जर्मनी 2025 Global Peace Index में 20वें स्थान पर था और इसके Societal Safety and Security domain में भी इसे सूचीबद्ध किया गया है।
भारतीय छात्रों के लिए जर्मनी में पढ़ाई का फैसला करते समय विश्वविद्यालय, शहर, रहने की जगह, सार्वजनिक परिवहन और स्थानीय प्रशासन की छात्र सेवाओं की जानकारी पहले से लेना उपयोगी है।
ऑस्ट्रेलिया: भारतीय छात्रों के लिए आधिकारिक सहायता उपलब्ध
ऑस्ट्रेलिया भी भारतीय विद्यार्थियों के प्रमुख study destinations में शामिल है। ऑस्ट्रेलिया स्थित भारतीय उच्चायोग भारतीय छात्रों के लिए अलग जानकारी उपलब्ध कराता है और वहां की आधिकारिक जानकारी में ऑस्ट्रेलिया को पढ़ाई और यात्रा के लिए सुरक्षित देश बताया गया है।
हालांकि, यहां भी छात्रों को अपने विश्वविद्यालय की emergency services, accommodation rules और स्थानीय कानूनों की जानकारी रखनी चाहिए।
कनाडा: सुरक्षा के साथ अब वीजा और study-permit rules भी महत्वपूर्ण
कनाडा भारतीय छात्रों के लिए एक प्रमुख education destination रहा है, लेकिन 2024 के बाद देश ने international student program में कई बदलाव किए हैं।
कनाडा सरकार के अनुसार 2026 में international student program के तहत 408,000 study permits जारी करने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें नए international students और existing students के extensions दोनों शामिल हैं। कुछ categories के लिए Provincial/Territorial Attestation Letter (PAL/TAL) की आवश्यकता भी अलग-अलग है।
कनाडा में पढ़ाई के लिए अधिकांश विदेशी छात्रों को study permit की जरूरत होती है। आवेदन के लिए designated learning institution (DLI) का acceptance letter और निर्धारित financial requirements सहित अन्य दस्तावेज जरूरी होते हैं।
इसलिए Canada चुनने वाले भारतीय छात्रों को सुरक्षा के साथ-साथ वर्तमान immigration और study-permit rules को भी आधिकारिक वेबसाइट से जांचना चाहिए।
अमेरिका: देश नहीं, शहर और विश्वविद्यालय की स्थिति भी देखें
अमेरिका में हजारों भारतीय छात्र अलग-अलग universities में पढ़ते हैं। लेकिन पूरे देश को एक ही safety category में रखना सही नहीं होगा। अमेरिका में विश्वविद्यालय, शहर और राज्य के अनुसार परिस्थितियां काफी अलग हो सकती हैं।
इसलिए किसी university को चुनने से पहले campus safety report, accommodation, emergency services और आसपास के क्षेत्र की जानकारी देखना ज्यादा उपयोगी है।
भारतीय छात्रों के लिए कौन-कौन से safety factors महत्वपूर्ण हैं?
विदेश में पढ़ाई के लिए देश चुनते समय इन पहलुओं की जांच करनी चाहिए:
1. शहर और campus की सुरक्षा
केवल देश की ranking देखकर फैसला न करें। जिस शहर में university है, वहां की स्थिति भी देखें।
2. International student support
University में emergency contact, counselling, accommodation और international student office की सुविधाएं उपलब्ध हैं या नहीं, यह जांचें।
3. स्थानीय कानून और emergency numbers
देश में पहुंचने से पहले emergency numbers और स्थानीय नियमों की जानकारी रखें।
4. Health insurance
विदेश जाने से पहले health insurance और university की healthcare facilities की जानकारी लेना जरूरी है।
5. भारतीय दूतावास/वाणिज्य दूतावास की जानकारी
अपने देश के diplomatic mission की emergency contact information सुरक्षित रखें।
6. Visa और study-permit rules
नियम समय के साथ बदल सकते हैं। इसलिए आवेदन से पहले संबंधित देश की official immigration website जरूर देखें।
क्या सिर्फ “सबसे सुरक्षित देश” देखकर विदेश में पढ़ाई का फैसला करना चाहिए?
नहीं। किसी देश की overall peace या safety ranking एक useful indicator हो सकती है, लेकिन यह किसी individual student के लिए complete safety assessment नहीं है।
एक छात्र के लिए सही विकल्प तय करते समय university, city, accommodation, tuition fee, scholarship, visa rules, healthcare, employment opportunities और personal circumstances को साथ में देखना चाहिए।
विदेश में पढ़ाई का फैसला करने वाले भारतीय छात्रों के लिए सबसे जरूरी बात यही है कि किसी सोशल मीडिया पोस्ट या एक घटना के आधार पर पूरे देश को सुरक्षित या असुरक्षित न मानें। आधिकारिक आंकड़ों और university तथा government sources से जानकारी लेकर फैसला करना अधिक उपयोगी है।
न्यूजीलैंड और आयरलैंड जैसे देश 2025 Global Peace Index में ऊंची स्थिति में रहे, जबकि जर्मनी और ऑस्ट्रेलिया भी सूची में शामिल हैं। कनाडा और अन्य प्रमुख study destinations के मामले में सुरक्षा के साथ immigration और student-policy changes को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
भारतीय छात्रों के लिए “सबसे सुरक्षित देश” की एक सार्वभौमिक सूची बनाने के बजाय, विश्वविद्यालय और शहर के स्तर पर सुरक्षा, छात्र सहायता और आधिकारिक नियमों की जांच करना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
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