धामी सरकार के 4 साल: ₹401.86 करोड़ की 74 विकास योजनाओं का लोकार्पण-शिलान्यास
चार वर्ष पूर्ण होने पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने गिनाईं उपलब्धियां
Dehradun, 23 March: देहरादून का परेड ग्राउंड सोमवार को सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम का मंच नहीं था, बल्कि पिछले चार सालों के कामकाज का आईना बन गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यहां ₹401.86 करोड़ की लागत से 74 विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास करते हुए अपनी सरकार की दिशा और प्राथमिकताएं साफ़ कीं।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को नवरात्र की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने अपने पुराने संकल्प को दोहराते हुए कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के सपनों को साकार करना ही सरकार की प्राथमिकता है और इसी दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।
सिर्फ आंकड़े नहीं, ज़मीन पर काम का दावा
74 परियोजनाओं का यह पैकेज सिर्फ संख्या नहीं, बल्कि शहरों से गांव तक फैले कामों का मिश्रण है—सीवर लाइन, सड़कें, स्कूल भवन, अस्पताल, नहरों का सुधार और बाढ़ सुरक्षा जैसे बुनियादी ढांचे पर फोकस दिखा।
- 41 योजनाएं पूरी होकर जनता को समर्पित
- 33 नई योजनाओं की शुरुआत
- कुल लागत ₹401.86 करोड़
सरकार का दावा है कि अब “शिलान्यास से लोकार्पण तक” का सफर तय समय में पूरा किया जा रहा है—जो पहले अक्सर अधूरा रह जाता था।

विकास की कहानी: आंकड़ों की जुबानी
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कई बड़े आंकड़े रखे—जो एक “तेजी से बढ़ते राज्य” की तस्वीर पेश करते हैं:
- अर्थव्यवस्था में डेढ़ गुना वृद्धि
- 7.23% जीएसडीपी ग्रोथ
- प्रति व्यक्ति आय में 41% उछाल
- 20,000 से ज्यादा उद्योग स्थापित
- स्टार्टअप्स की संख्या ढाई गुना से ज्यादा
- 2.65 लाख महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बनीं
ये आंकड़े जितने प्रभावशाली हैं, उतना ही बड़ा सवाल भी छोड़ते हैं—क्या ये बदलाव हर व्यक्ति तक पहुंच रहा है?
निवेश से पहचान तक
उत्तराखंड अब सिर्फ पर्यटन नहीं, निवेश के नक्शे पर भी अपनी जगह बना रहा है—ऐसा सरकार का दावा है।
- ₹3.76 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव
- ₹1 लाख करोड़ से ज्यादा निवेश धरातल पर
- G-20 और राष्ट्रीय खेलों की मेजबानी
- सतत विकास लक्ष्य इंडेक्स में देश में पहला स्थान
यह सब राज्य को “छोटे राज्य, बड़े विजन” की पहचान देने की कोशिश है।
युवाओं के लिए क्या बदला?
धामी सरकार ने युवाओं को लेकर सख्त संदेश देने की कोशिश की—
- 30,000 से ज्यादा सरकारी नौकरियां
- पेपर लीक और नकल पर सख्त कानून
- 100 से ज्यादा नकल माफिया जेल में
यहां सरकार खुद को “सिस्टम बदलने वाली” बताती है, लेकिन युवाओं की अपेक्षाएं अभी भी उतनी ही बड़ी हैं।
देहरादून: बदलते शहर की कहानी
राजधानी देहरादून को मॉडल सिटी बनाने की दिशा में ₹1400 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है।
सड़क, सीवर, ट्रैफिक और शहरी ढांचे को सुधारने की कोशिशें जारी हैं—हालांकि शहर की जमीनी चुनौतियां अभी भी खत्म नहीं हुई हैं।
सख्त फैसले और सामाजिक संदेश
सरकार ने सिर्फ विकास ही नहीं, बल्कि “नीतिगत बदलाव” को भी अपनी उपलब्धि बताया—
- समान नागरिक संहिता लागू
- धर्मांतरण विरोधी कानून
- 12,000 एकड़ सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाया
- मदरसों में मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम लागू करने की तैयारी
चार साल का यह रिपोर्ट कार्ड कई मायनों में “उपलब्धियों का बयान” है—जहां आंकड़े मजबूत हैं, दावे बड़े हैं और इरादे साफ़ दिखते हैं। लेकिन असली कहानी वही होगी जो आने वाले समय में ज़मीन पर दिखेगी—क्योंकि विकास की असली कसौटी भाषण नहीं, असर होता है।
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