महात्मा खुशी राम पब्लिक लाइब्रेरी में मासिक संगीत संध्या का शुभारंभ
Dehradun, 06 October: संगीत की सुरमई शाम ने देहरादून की सांस्कृतिक धरोहर को एक बार फिर जीवंत कर दिया। महात्मा खुशी राम पब्लिक लाइब्रेरी में आयोजित मासिक संगीत संध्या का आगाज़ सुरों और भावनाओं के संगम के रूप में हुआ, जहां शहर के नामचीन कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
मधुर संगीत और ग़ज़लों से सजी संध्या
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती की वंदना और दीप प्रज्वलन से हुई, जिसे विश्व रिकॉर्ड धारक अंजू पांडे, डॉ. सरस्वती सिंह, डॉ. अरुण भट्ट, जगदीश बावला और सुकीर्ति आर्या ने संयुक्त रूप से संपन्न किया। मां सरस्वती की वंदना के उपरांत विश्व रिकॉर्ड धारक अंजू पाण्डे ने अपनी मधुर आवाज़ में ग़ज़ल “ये ज़मीन चांद से बेहतर नजर आती है हमें” प्रस्तुत की, जिसने कार्यक्रम की शुरुआत को भावनात्मक बना दिया।

गायकी से किया मंत्रमुग्ध
इसके बाद डॉ. अरुण भट्ट ने अपनी गायकी से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। उन्होंने हम ज़िंदगी की आस करे भी तो क्या करे और बदलने वाले ज़रा तक़दीर बदलना मेरी, हमने तुझको तेरी तक़दीर बदलते देखा ग़ज़लें पेश कर अपनी आवाज़ का जादू बिखेरा। उनके बाद तरन सिंह ने ग़ज़ल गायन से संध्या को आगे बढ़ाया, जबकि ज्ञानेंद्र कुमार ने अपनी ग़ज़ल, ज़िंदगी सबको मिली हो ये ज़रूरी तो नहीं है के जरिए माहौल को भावपूर्ण बना दिया।
कार्यक्रम का संचालन जगदीश बावला ने किया। उन्होंने सभी कलाकारों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम सांस्कृतिक परंपरा को जीवित रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
कार्यक्रम में कला और साहित्य से जुड़े अनेक विद्वानों की उपस्थिति देखने को मिली। इस मौके पर राकेश अग्रवाल, सत्यप्रकाश शर्मा, ज्ञानेंद्र कुमार, डी.डी.पी. पालीवाल, डॉ. राजेश डोभाल, डॉ. लक्ष्मी कांत त्रिपाठी, इंदु अग्रवाल, डॉ. सरस्वती सिंह, रूपचंद गुरुजी, नरेंद्र शर्मा “अमन”, नरेंद्र चंचल, रविंद्र सेठ, डॉ. निर्मल पांडे, कविता दत्ता, के.एन. सिंह नागिया, पीतांबर जोशी, सुनील मदान, सुकीर्ति आर्या व वर्तिका त्रिपाठी आदि प्रमुखरूप से मौजूद रहे।
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