अल्मोड़ा से उत्तरकाशी तक कई जिलों के जलग्रहण क्षेत्रों में कम से मध्यम फ्लैश फ्लड रिस्क, निचले इलाकों में जलभराव की आशंका
Dehradun | August 11, 2026
उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के बीच अगले 24 घंटे प्रदेश के कई हिस्सों के लिए सतर्कता वाले हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के हाइड्रोमेट डिवीजन की फ्लैश फ्लड गाइडेंस सेल ने 11 अगस्त 2026 को शाम 5:30 बजे तक के लिए फ्लैश फ्लड रिस्क बुलेटिन जारी किया है। इसमें राज्य के 12 जिलों के कुछ जलग्रहण क्षेत्रों और आसपास के इलाकों में कम से मध्यम स्तर के फ्लैश फ्लड का जोखिम जताया गया है।
बुलेटिन के मुताबिक अल्मोड़ा, बागेश्वर, चमोली, चंपावत, देहरादून, टिहरी गढ़वाल, हरिद्वार, नैनीताल, पिथौरागढ़, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पौड़ी गढ़वाल में कुछ क्षेत्रों को फ्लैश फ्लड के संभावित जोखिम वाले क्षेत्रों में रखा गया है।
संतृप्त जमीन से बढ़ सकती है परेशानी
लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में मिट्टी पहले से ही काफी संतृप्त है। ऐसे में तेज बारिश होने पर पानी के जमीन में समाने की क्षमता घट सकती है और सतही बहाव बढ़ने के साथ निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है। छोटी जलधाराओं और बरसाती नालों में भी अचानक पानी बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
24 घंटे अलर्ट मोड पर आपदा तंत्र
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन के मुताबिक मौसम विभाग और अन्य तकनीकी एजेंसियों से मिल रही चेतावनियों के आधार पर राज्य का आपदा प्रबंधन तंत्र अलर्ट मोड पर है। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) से प्रदेशभर की स्थिति पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है और सभी जिलों के आपातकालीन परिचालन केंद्रों के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा गया है।
संभावित फ्लैश फ्लड, जलभराव, भूस्खलन और नदियों-नालों में अचानक बढ़ने वाले जलस्तर को देखते हुए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों को स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार जरूरी सावधानियां बरतने के निर्देश दिए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ ही राहत और बचाव एजेंसियों को भी तैयार रखा गया है।
पर्यटकों और लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील
आपदा प्रबंधन विभाग ने खराब मौसम और लगातार बारिश के दौरान लोगों से अनावश्यक यात्रा नहीं करने की अपील की है। नदी, नाले, गदेरे और बरसाती जलधाराओं के आसपास जाने से बचने तथा जलस्तर बढ़ने पर तत्काल सुरक्षित स्थान पर जाने को कहा गया है।
पहाड़ी इलाकों में छोटी जलधाराएं भी अचानक उफान पर आ सकती हैं। ऐसे में पुल-पुलियों, नदी किनारे और जलभराव वाले रास्तों को पार करने की कोशिश न करने की सलाह दी गई है। भूस्खलन संभावित मार्गों पर विशेष सावधानी बरतने और यात्रा शुरू करने से पहले मौसम के साथ-साथ सड़क की स्थिति की जानकारी लेने को कहा गया है।
SEOC द्वारा मौसम की स्थिति, नदियों के जलस्तर और संवेदनशील क्षेत्रों में हालात की लगातार निगरानी की जा रही है।
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