उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी मंच ने विमला कोटियाल के निधन पर जताया गहरा शोक, गवाहों की उपेक्षा पर उठाए सवाल
Dehradun, 31 May 2026: उत्तराखंड राज्य आंदोलन के संघर्षपूर्ण इतिहास की एक महत्वपूर्ण गवाह अब हमेशा के लिए खामोश हो गई हैं। मुजफ्फरनगर गोलीकांड की मुख्य गवाह और वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी विमला कोटियाल का शनिवार देर शाम हार्ट अटैक से निधन हो गया। उनके निधन से राज्य आंदोलन से जुड़े लोगों में शोक की लहर है। आंदोलनकारियों का कहना है कि उत्तराखंड राज्य निर्माण के लिए संघर्ष करने वालों की आवाज बुलंद करने वाली विमला कोटियाल अपने जीवनकाल में कई ऐसे सवाल छोड़ गईं, जिनका जवाब आज भी व्यवस्था के पास नहीं है।
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मंच के प्रदेश अध्यक्ष जगमोहन सिंह नेगी एवं प्रदेश प्रवक्ता प्रदीप कुकरेती ने कहा कि विमला कोटियाल ने उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उन्होंने मुजफ्फरनगर गोलीकांड मामले में गवाही देकर आंदोलनकारियों की आवाज को मजबूती प्रदान की। हालांकि, आंदोलन से जुड़े कई मुद्दे और उनकी मांगें आज भी अधूरी हैं।
प्रदीप कुकरेती ने बताया कि विमला कोटियाल से उनका समय-समय पर संवाद होता रहता था। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर गोलीकांड के गवाहों की सुरक्षा को लेकर आंदोलनकारी मंच ने तत्कालीन डीजी से मांग की थी, जिसे स्वीकार किया गया था। विमला कोटियाल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर आंदोलन के गवाहों से जुड़े मुद्दों को भी उठाया था, लेकिन उनकी कई मांगें आज तक पूरी नहीं हो सकीं।
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सुलोचना भट्ट, अरुणा थपलियाल एवं द्वारिका बिष्ट ने कहा कि रुद्रप्रयाग और चमोली क्षेत्र के अनेक राज्य आंदोलनकारियों ने संघर्ष और पीड़ा झेली, लेकिन उन्हें अपेक्षित सम्मान और सुविधाएं नहीं मिल पाईं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है कि राज्य निर्माण में योगदान देने वाले आंदोलनकारियों, गवाहों और शहीद परिवारों की समस्याओं का समाधान करें।
आंदोलनकारियों ने कहा कि मुजफ्फरनगर घटना के गवाहों की लगातार उपेक्षा किए जाने से उनमें आक्रोश की भावना है। विमला कोटियाल भी इस बात को लेकर चिंतित रहती थीं कि आंदोलन के गवाहों और शहीद परिवारों की सुध लेने के लिए सरकार की ओर से पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए।
शोक व्यक्त करने वालों में केशव उनियाल, जगमोहन सिंह नेगी, रामलाल खंडूड़ी, प्रदीप कुकरेती, पृथ्वी सिंह नेगी, सतेन्द्र भंडारी, विजय बलूनी, अनुज नौटियाल, हरी सिंह मेहर, सुशील चमोली, मनोज नौटियाल, मोहन रावत, सुमित थापा, विनोद असवाल, सतेन्द्र नौगांई, प्रभात डंडरियाल, गणेश डंगवाल, वेदा कोठारी, राकेश नौटियाल, राजेश पान्थरी, मोहन थापा, सुलोचना भट्ट, पुष्पलता सिलमाणा, राधा तिवारी, द्वारिका बिष्ट, तारा पांडे, राजेश्वरी परमार, शकुन्तला रावत, रामेश्वरी नेगी, अरुणा थपलियाल, कमला कंडारी सहित अन्य राज्य आंदोलनकारी शामिल रहे।
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