उजालों की संध्या में दर्द गढ़वाली की ग़ज़लों ने छुआ दिलों का तार

दर्द गढ़वाली का ग़ज़ल संग्रह ‘उजाले बाँटते रहना’ का लोकार्पण

दर्द गढ़वाली का ग़ज़ल संग्रह ‘उजाले बाँटते रहना’ का लोकार्पण

Dehradun, 24 October: गुरुवार की शाम उत्तरांचल प्रेस क्लब में कुछ ऐसी थी, मानो शब्दों ने साँस ले ली हो और भावनाएँ ग़ज़ल बनकर बिखर गई हों। अवसर था वरिष्ठ पत्रकार और शायर दर्द गढ़वाली के नए ग़ज़ल संग्रह ‘उजाले बाँटते रहना’ के लोकार्पण का।

संध्या का प्रारंभ सत्यप्रकाश शर्मा ‘सत्य’ की मधुर सरस्वती वंदना से हुआ, जिसने सभा में एक पवित्र सन्नाटा घोल दिया। उपस्थित लोगों में शहर के कई साहित्य–प्रेमी, कवि और पत्रकार थे। अध्यक्षता इक़बाल आज़र ने की और मुख्य अतिथि के रूप में विजय कुमार ‘द्रोणी’, नवीन नीर, भूपेन्द्र कंडारी, डॉ. अतुल शर्मा, सुनील साहिल और राजकुमार राज़ उपस्थित रहे।

जब संग्रह की समीक्षा की बारी आई, तो सुनील साहिल ने कहा कि दर्द गढ़वाली की शायरी किसी किताब के पन्नों में नहीं, लोगों के दिलों में बसती है। उसमें मज़दूर का पसीना है, किसान की उम्मीद है, और उस आम आदमी का दर्द है जो बोल नहीं पाता।

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डॉ. अतुल शर्मा ने कहा कि इनकी ग़ज़लें समाज का आईना हैं। इनमें प्रेम भी है, व्यंग्य भी, और वह कटाक्ष भी जो सोचने पर विवश कर दे।
इक़बाल आज़र ने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि दर्द गढ़वाली की रचनाएँ सजावट से नहीं, सच्चाई से चमकती हैं। वे अपने आसपास के समाज को देखकर लिखते हैं, और शायद यही वजह है कि उनकी हर ग़ज़ल हमें अपनी लगती है।

जब मंच पर खुद दर्द गढ़वाली आए और अपनी ग़ज़लें “अपनी दुल्हन सजा रहा हूँ मैं” तथा “अब कबूतर उड़ा रहा हूँ मैं” सुनाईं, तो सभा में जैसे समय ठहर गया। हर शेर पर ‘वाह’ की आवाज़ गूँज उठती रही। उनकी आवाज़ में वह सादगी थी, जो सीधे हृदय में उतर जाती है।

कार्यक्रम के उत्तरार्ध में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ, जिसमें नवीन नीर, सुनील साहिल, बादल बाजपुरी, डॉ. अतुल शर्मा, इक़बाल आज़र और भूपेन्द्र कंडारी ने अपनी रचनाओं से माहौल को और भी जीवंत कर दिया।

यह संध्या केवल एक पुस्तक–लोकार्पण नहीं थी, यह शब्दों का उत्सव था, जहाँ हर शेर ने उम्मीद जगाई, हर मिसरा ने अँधेरे में उजाला बाँटा। जैसे खुद दर्द गढ़वाली की ग़ज़लें कह रही हों— “जो दर्द से भी उजाला करे, वही असली शायर होता है।”

 

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Ravi Priyanshu

Ravi Priyanshu is a journalist, novelist, and Founder & Editor-in-Chief of The India Vox. With 23+ years of experience, he is dedicated to credible journalism and meaningful storytelling.

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