1962 के भारत-चीन युद्ध, इंदिरा गांधी के कार्यकाल और राहुल गांधी की टिप्पणियों का जिक्र; कांग्रेस से राष्ट्रीय सुरक्षा पर आधिकारिक रुख स्पष्ट करने की मांग।
देहरादून | 13 अक्टूबर, 2026
उत्तराखंड पूर्व सैनिक कल्याण सलाहकार परिषद के अध्यक्ष एवं भाजपा नेता कर्नल अजय कोठियाल ने कांग्रेस की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी नीतियों और उसके शीर्ष नेतृत्व के फैसलों पर सवाल उठाए हैं। देहरादून में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की चीन नीति से लेकर राहुल गांधी की हालिया टिप्पणियों तक का जिक्र करते हुए कांग्रेस से राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।
कर्नल कोठियाल ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर कांग्रेस नेतृत्व का रवैया लगातार सवालों के घेरे में रहा है। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा से जुड़े फैसलों में हुई गलतियों की कीमत सैनिकों को नहीं चुकानी चाहिए और राजनीतिक नेतृत्व को भी अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए।
1962 के भारत-चीन युद्ध का जिक्र कर नेहरू की नीति पर उठाए सवाल
कर्नल अजय कोठियाल ने वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध का उल्लेख करते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की चीन नीति की आलोचना की। उन्होंने 1954 के पंचशील समझौते और तिब्बत से जुड़े घटनाक्रमों को भारत की सामरिक स्थिति के संदर्भ में उठाया।
उनका कहना था कि ‘हिंदी-चीनी भाई-भाई’ के दौर में चीन की मंशा को समझने और सीमा सुरक्षा की पर्याप्त तैयारी करने में तत्कालीन नेतृत्व से चूक हुई। उन्होंने डॉ. भीमराव आंबेडकर और आचार्य जे.बी. कृपलानी की चीन नीति तथा पंचशील को लेकर जताई गई आपत्तियों का भी उल्लेख किया।
कर्नल कोठियाल ने 1962 के युद्ध के दौरान सैन्य नेतृत्व और जनरल बी.एम. कौल की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सैन्य कमान और रणनीतिक फैसलों में पर्याप्त सैन्य अनुभव तथा योग्यता को प्राथमिकता नहीं दी गई। उनके अनुसार, युद्ध के दौरान सैनिकों को हथियारों, भोजन और कपड़ों जैसी बुनियादी आवश्यकताओं के लिए भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
सैनिकों की वीरता का उल्लेख, सैन्य तैयारियों पर जवाबदेही की मांग
1962 के युद्ध का जिक्र करते हुए कर्नल कोठियाल ने भारतीय सैनिकों के साहस और बलिदान को याद किया। उन्होंने रेजांग ला में मेजर शैतान सिंह और उनके साथियों की वीरता के साथ जसवंत सिंह रावत के बलिदान का उल्लेख किया। उन्होंने 4 गढ़वाल राइफल्स और 13 कुमाऊं रेजिमेंट के सैनिकों के योगदान को भी रेखांकित किया।
उन्होंने कहा कि सैनिकों का शौर्य राजनीतिक और रणनीतिक कमियों पर पर्दा डालने का आधार नहीं बनना चाहिए। उनके मुताबिक, देश को यह जानने का अधिकार है कि सीमा पर तैनात जवानों को पर्याप्त संसाधन, उचित रणनीति और सक्षम नेतृत्व क्यों नहीं मिल पाया। उन्होंने 1962 के युद्ध से जुड़े सैन्य समीक्षा दस्तावेजों पर चर्चा को भी जरूरी बताया।
इंदिरा गांधी के कार्यकाल और आपातकाल पर भी साधा निशाना
कर्नल अजय कोठियाल ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल से जुड़ी कई घटनाओं का उल्लेख किया। इनमें मार्च 1966 में मिजोरम के आइजोल में भारतीय वायुसेना की कार्रवाई, नवंबर 1966 में गौ-रक्षा आंदोलन के दौरान संसद के निकट हुई पुलिस फायरिंग और वर्ष 1975 में आपातकाल लागू किए जाने का फैसला शामिल रहा।
उन्होंने इन घटनाओं को सत्ता के इस्तेमाल, नागरिक अधिकारों और सरकार की जवाबदेही से जुड़े सवालों के रूप में प्रस्तुत किया। कर्नल कोठियाल के अनुसार, आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का ऐसा अध्याय है, जो सत्ता के केंद्रीकरण और असहमति को दबाने के परिणामों की याद दिलाता है।
राहुल गांधी के राजनीतिक आचरण पर भी उठाए सवाल
प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर्नल कोठियाल ने राहुल गांधी के राजनीतिक आचरण की आलोचना करते हुए वर्ष 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सरकार के अध्यादेश की प्रति फाड़ने की घटना का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष को सरकार की आलोचना करने का पूरा अधिकार है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा और संवैधानिक प्रक्रियाओं से जुड़े विषयों पर राजनीतिक नेताओं को जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी के कुछ बयानों में इस जिम्मेदारी का अभाव दिखाई देता है।
अजीत डोभाल पर टिप्पणी को लेकर कांग्रेस से मांगा स्पष्टीकरण
कर्नल कोठियाल ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लेकर राहुल गांधी की कथित टिप्पणियों पर भी आपत्ति जताई। प्रेस विज्ञप्ति में 19 सितंबर को मध्य प्रदेश के इंदौर में आयोजित ‘छात्र संसद’ कार्यक्रम का उल्लेख किया गया है। कर्नल कोठियाल ने राहुल गांधी से इन टिप्पणियों के संदर्भ में अपने तथ्यों की पुष्टि करने को कहा।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा केवल सीमाओं पर तैनात सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं है। खुफिया जानकारी, रणनीतिक तैयारी, विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय और समय पर निर्णय लेना भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसी संदर्भ में उन्होंने अजीत डोभाल के खुफिया अनुभव और सुरक्षा अभियानों में उनकी भूमिका का उल्लेख किया।
सर्जिकल स्ट्राइक से ऑपरेशन सिंदूर तक का किया उल्लेख
कर्नल अजय कोठियाल ने वर्ष 2015 में म्यांमार में हुई कार्रवाई, 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक, 2019 की बालाकोट कार्रवाई और वर्ष 2025 के ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऐसे अभियानों में सैनिकों के साहस के साथ रणनीतिक स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों का योगदान भी महत्वपूर्ण होता है।
उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैसे संवेदनशील पद पर आसीन व्यक्ति के संबंध में राजनीतिक बयान देते समय सावधानी बरतने की जरूरत बताई। साथ ही कांग्रेस से सवाल किया कि क्या पार्टी राहुल गांधी की अजीत डोभाल को लेकर की गई टिप्पणियों का समर्थन करती है और क्या वह इस विषय पर अपना आधिकारिक रुख स्पष्ट करेगी।
कांग्रेस से राष्ट्रीय सुरक्षा पर स्पष्ट रुख रखने की मांग
कर्नल कोठियाल ने कांग्रेस नेतृत्व से राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर आत्ममंथन करने की मांग की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हित सर्वोपरि होना चाहिए और सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मामलों में राजनीतिक बयानबाजी के दौरान तथ्यों तथा जिम्मेदारी का ध्यान रखा जाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस की राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी सोच पर गंभीर सवाल हैं और पार्टी को देश के सामने अपना स्पष्ट दृष्टिकोण रखना चाहिए।
डिस्क्लेमर: यह समाचार संबंधित पक्ष द्वारा उपलब्ध कराई गई प्रेस विज्ञप्ति के आधार पर तैयार किया गया है। इसमें व्यक्त विचार, आरोप और दावे संबंधित वक्ता के हैं। The India Vox इन विचारों या दावों की स्वतंत्र पुष्टि का दावा नहीं करता और न ही इनसे किसी प्रकार की सहमति व्यक्त करता है। समाचार का उद्देश्य पाठकों तक सूचना पहुंचाना है। संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष या प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे उचित स्थान दिया जाएगा।
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