सरकारी नौकरी के लिए दस्तावेजों का खेल? RTI क्लब के खुलासे से मचा हड़कंप

सरकारी नौकरी के लिए दस्तावेजों का खेल? RTI क्लब के खुलासे से मचा हड़कंप

RTI क्लब की उपाध्यक्ष रीटा सूरी ने नगर निगम से प्राप्त दस्तावेजों के आधार पर जन्मतिथि और सेवा अभिलेखों में कथित विसंगतियों का दावा करते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की

Dehradun, 10 June 2026: राजधानी देहरादून में कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सरकारी नौकरी और सरकारी सुविधाएं प्राप्त करने का मामला सामने आया है। मंगलवार को आयोजित एक प्रेस वार्ता में आरटीआई क्लब की उपाध्यक्ष रीटा सूरी ने सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए कई गंभीर आरोप लगाए और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की।

रीटा सूरी का दावा है कि नगर निगम देहरादून से RTI के तहत प्राप्त दस्तावेजों में एक ही परिवार से जुड़े अभिलेखों में कई विसंगतियां सामने आई हैं। उनके अनुसार, उपलब्ध रिकॉर्ड में परिवार की दो बेटियों की जन्मतिथियों के बीच असामान्य रूप से कम अंतर दर्ज है, जिससे दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े होते हैं।

प्रेस वार्ता के दौरान उन्होंने आरोप लगाया कि एक पुत्री की जन्मतिथि वर्ष 1987 में दर्ज है, जबकि दूसरी पुत्री की जन्मतिथि 1 जनवरी 1988 दर्शाई गई है। उनका कहना है कि दोनों जन्मतिथियों के बीच बेहद कम अंतर होना दस्तावेजों की सत्यता को संदेह के घेरे में लाता है और इसकी जांच आवश्यक है।

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रीटा सूरी ने एक अन्य मामले का भी उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि परिवार की एक सदस्य को नगर निगम में मृतक आश्रित के आधार पर नौकरी दिलाने के लिए अलग-अलग दस्तावेजों में अलग-अलग जन्मतिथियों का उपयोग किया गया। उनका कहना है कि यदि शैक्षणिक प्रमाणपत्रों, पहचान पत्रों और सेवा संबंधी अभिलेखों में भिन्न-भिन्न जानकारियां दर्ज हैं, तो सत्यापन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी सवाल उठते हैं।

उन्होंने नगर निगम और जिला प्रशासन की सत्यापन प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि यदि दस्तावेजों में कथित विसंगतियां मौजूद थीं तो संबंधित अधिकारियों द्वारा उन्हें कैसे स्वीकार किया गया। प्रेस वार्ता में उन्होंने उस स्थानीय जनप्रतिनिधि की भूमिका की जांच की भी मांग की, जिसने कथित तौर पर संबंधित व्यक्तियों के चरित्र सत्यापन अथवा प्रमाणन से जुड़े दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए थे।

रीटा सूरी ने कहा कि मामले में निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कहीं सरकारी नौकरी और अन्य लाभ प्राप्त करने के लिए फर्जी या भ्रामक दस्तावेजों का इस्तेमाल तो नहीं किया गया। उन्होंने दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की।

हालांकि, प्रेस वार्ता में लगाए गए आरोपों की अभी तक स्वतंत्र रूप से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले की वास्तविक स्थिति विभागीय अथवा प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। रीटा सूरी का कहना है कि जिन दस्तावेजों के आधार पर ये आरोप लगाए जा रहे हैं, वे सभी नगर निगम देहरादून द्वारा आरटीआई के तहत उपलब्ध कराए गए अभिलेख हैं।

नोट: यह समाचार प्रेस वार्ता में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। आरोपों की आधिकारिक पुष्टि या जांच रिपोर्ट अभी सामने नहीं आई है। संबंधित पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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The India Vox

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Chief Editor

Ravi Priyanshu

Ravi Priyanshu is a journalist, novelist, and Founder & Editor-in-Chief of The India Vox. With 23+ years of experience, he is dedicated to credible journalism and meaningful storytelling.

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