टिहरी के प्रतापनगर तहसील के देवल गांव में 18 वर्षीय केतन की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक परिवार का चिराग बुझने के साथ समाज के सामने रिश्तों, संवाद और संवेदनशीलता को लेकर नई बहस भी खड़ी हो गई है
Dehradun, 10 June 2026: टिहरी गढ़वाल के प्रतापनगर की पहाड़ियों में बसे छोटे से देवल गांव में इन दिनों सन्नाटा पसरा है। जिन रास्तों पर कुछ दिन पहले तक 18 वर्षीय केतन लाल अपने दोस्तों के साथ हंसते-बोलते नजर आता था, आज उन्हीं रास्तों पर उसकी मौत की चर्चा है। गांव के लोग अभी भी यकीन नहीं कर पा रहे कि सपनों से भरी उम्र में एक युवक की जिंदगी इतनी दर्दनाक तरीके से खत्म हो जाएगी।
18 साल की उम्र में ज्यादातर युवा अपने भविष्य के सपने बुन रहे होते हैं। कोई पढ़ाई पूरी करने की तैयारी कर रहा होता है, कोई नौकरी के बारे में सोच रहा होता है और कोई अपने परिवार की उम्मीदों को पूरा करने का सपना देख रहा होता है। शायद केतन लाल की दुनिया भी कुछ ऐसी ही रही होगी। लेकिन प्रतापनगर से आई इस खबर ने एक परिवार की दुनिया हमेशा के लिए बदल दी।
मीडिया रिपोर्टों और परिजनों के आरोपों के अनुसार, केतन लाल का नाम एक प्रेम संबंध से जुड़े विवाद में सामने आया। आरोप है कि उसे और उसके एक मित्र को रात में बुलाया गया और फिर उनके साथ गंभीर मारपीट की गई। घायल अवस्था में दोनों को अस्पताल ले जाया गया, जहां केतन ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने मामले में हत्या सहित विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
यह घटना केवल एक आपराधिक मामला भर नहीं रह गई है। मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया जब पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत भी मुकदमा दर्ज किया। परिजनों का आरोप है कि केतन को केवल एक प्रेम संबंध की वजह से नहीं, बल्कि उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण भी निशाना बनाया गया। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
टिहरी के प्रतापनगर तहसील के देवल गांव में आज जिस घर में मातम पसरा है, वहां कुछ दिन पहले तक भविष्य की बातें होती होंगी। एक मां ने अपने बेटे के लिए सपने देखे होंगे, एक पिता ने उसके बेहतर जीवन की उम्मीद की होगी। लेकिन आज उसी परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनका बेटा आखिर किस गलती की सजा भुगत गया।
परिजनों के आरोप और भी विचलित करने वाले हैं। उनका दावा है कि केतन के शरीर पर गंभीर चोटों के निशान थे और उसके साथ बेहद क्रूरता की गई। इन दावों की सत्यता की जांच पुलिस कर रही है, लेकिन इन आरोपों ने पूरे मामले को और संवेदनशील बना दिया है।
उत्तराखंड के पहाड़ अपनी सादगी, सामाजिक सौहार्द और मानवीय मूल्यों के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में प्रतापनगर की शांत घाटी से आई यह घटना कई असहज सवाल खड़े कर रही है। क्या आज भी प्रेम संबंधों को लेकर समाज के कुछ हिस्सों में इतनी असहिष्णुता मौजूद है? क्या किसी युवक या युवती की पसंद किसी की जान लेने का कारण बन सकती है? और यदि जातीय भेदभाव का आरोप सही साबित होता है, तो यह सवाल और भी गंभीर हो जाता है।
यह कहानी सिर्फ केतन लाल की नहीं है। यह उन तमाम युवाओं की कहानी भी है जो अपने सपनों, रिश्तों और भविष्य के साथ एक बेहतर जीवन की उम्मीद रखते हैं। यह कहानी उन परिवारों की भी है जो अपने बच्चों को सुरक्षित और सम्मानजनक जीवन देना चाहते हैं।
कानून अपना काम करेगा। जांच होगी, आरोप तय होंगे और अदालत अपना फैसला सुनाएगी। लेकिन न्यायिक प्रक्रिया से इतर एक सच्चाई अभी से सामने है—प्रतापनगर के एक घर का चिराग बुझ चुका है। 18 साल की उम्र में एक जिंदगी खत्म हो गई है, और उसके साथ कई सपने भी हमेशा के लिए दफन हो गए हैं।
केतन अब वापस नहीं आएगा। लेकिन उसकी कहानी शायद समाज को यह सोचने पर मजबूर कर सकती है कि असहमति, रिश्तों और सामाजिक स्वीकार्यता के सवालों का जवाब हिंसा नहीं, संवाद होना चाहिए। क्योंकि जब किसी युवा की जिंदगी नफरत, पूर्वाग्रह या सामाजिक दबाव की भेंट चढ़ती है, तो हार केवल एक परिवार की नहीं, पूरे समाज की होती है।
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