ऐतिहासिक खलंगा युद्धस्थल पर मनाया गया अंतरराष्ट्रीय योग दिवस, 140 साधकों ने किया योगाभ्यास
- सागरताल में आयोजित कार्यक्रम में गोर्खा समाज, योग साधकों और गणमान्य लोगों की रही सहभागिता
Dehradun | June 21, 2026
विश्व योग दिवस के अवसर पर बलभद्र खलंगा विकास समिति द्वारा विश्व प्रसिद्ध एंग्लो-गोर्खा युद्धस्थल सागरताल की ऐतिहासिक भूमि पर भव्य योग कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में पतंजलि योगपीठ, हरिद्वार की योगाचार्य शालिनी गुरुंग के नेतृत्व में 140 योग साधकों ने सामूहिक योगाभ्यास कर स्वास्थ्य और संतुलित जीवन का संदेश दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ गणेश वंदना और सरस्वती वंदना के साथ हुआ। इसके बाद 81 वर्षीय जयंती देवी गुरुंग ने प्रथम योगाभ्यास कर कार्यक्रम की औपचारिक शुरुआत की। उपस्थित लोगों ने उनके उत्साह और ऊर्जा की सराहना की।
योग कार्यक्रम में उत्तराखंड सरकार द्वारा नवगठित गोर्खा परिषद की अध्यक्षा ज्योति कुटिया (दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री) और उपाध्यक्ष अबू शाही (दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री) मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। समिति के पदाधिकारियों और सदस्यों ने दोनों अतिथियों का पारंपरिक स्वागत एवं सम्मान किया।
इस अवसर पर समिति के संरक्षक एवं पूर्व डीएफओ इंद्रेश उपाध्याय, वरिष्ठ सदस्य राम सिंह थापा (पूर्व अध्यक्ष), जितेंद्र खत्री (पूर्व उपाध्यक्ष) तथा कर्नल ईश्वर सिंह थापा को भी सम्मानित किया गया। समिति की उपाध्यक्षा बिनु गुरुंग ने वरिष्ठ सदस्य सुशील पवार और योग साधिका जयंती देवी गुरुंग को सम्मान प्रदान किया।
कार्यक्रम की एक विशेष आकर्षण ‘खलंगा बैटल वॉक’ भी रही, जिसका आयोजन दून विश्वविद्यालय की प्रोफेसर सरगम मेहरा के नेतृत्व में समिति के सहयोग से किया गया। इस दौरान प्रतिभागियों को खलंगा युद्ध स्मारक तक ले जाया गया, जहां समिति के अध्यक्ष कर्नल विक्रम सिंह थापा ने खलंगा युद्ध के ऐतिहासिक महत्व और वीर गोरखा सैनिकों के अदम्य साहस के बारे में जानकारी दी।
समिति के अध्यक्ष कर्नल विक्रम सिंह थापा के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों, योग साधकों और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ, जिसके बाद प्रतिभागियों के लिए जलपान की व्यवस्था की गई।
आयोजकों ने कहा कि ऐतिहासिक और प्रेरणादायक स्थल पर आयोजित योग कार्यक्रम का उद्देश्य केवल शारीरिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि युवाओं को अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जोड़ना भी है।
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