असफलताओं से नहीं टूटा हौसला, अब सैकड़ों युवाओं की राह रोशन कर रहीं प्रियांशी

असफलताओं को ताकत बनाकर युवाओं की मार्गदर्शक बनीं प्रियांशी रावत।

बार-बार मेरिट से चूकने के बावजूद नहीं मानी हार, आज शिक्षक और मेंटर बनकर छात्रों का भविष्य संवार रहीं प्रियांशी रावत

Dehradun | June 22, 2026

हर साल लाखों युवा किसी न किसी प्रतियोगी परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन सफलता कुछ को ही मिलती है। ऐसे में कई सपने टूटते हैं, कई उम्मीदें बिखरती हैं और कुछ युवा निराशा के अंधेरे में चले जाते हैं। लेकिन देहरादून की प्रियांशी रावत की कहानी बताती है कि असफलता मंजिल का अंत नहीं, बल्कि नए रास्ते की शुरुआत भी हो सकती है। कई प्रतिष्ठित परीक्षाओं में अंतिम चयन से चूकने के बाद भी उन्होंने अपने हौसले को टूटने नहीं दिया और आज वे शिक्षा के माध्यम से दूसरों के सपनों को उड़ान देने का काम कर रही हैं।

उत्तराखंड राज्य गठन के वर्ष 2000 में जन्मी प्रियांशी रावत शुरू से ही पढ़ाई में मेधावी रहीं। उन्होंने 10वीं, 12वीं, बीएससी और एमएससी (गणित) में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उनका सपना आईआईटी से कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करने का था। इसके लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की और प्रवेश परीक्षा में सफलता भी हासिल की, लेकिन सामान्य वर्ग की मेरिट सूची में मामूली अंतर से स्थान नहीं बना सकीं।

📌 यह भी पढ़ें: देश की प्रमुख खबरें

आईआईटी में प्रवेश का सपना अधूरा रहने के बाद उन्होंने भारतीय वायुसेना में अधिकारी बनने का लक्ष्य चुना। AFCAT परीक्षा में कई बार सफलता प्राप्त की, एसएसबी इंटरव्यू और मेडिकल प्रक्रिया भी पार की, लेकिन अंतिम मेरिट सूची में चयन नहीं हो सका।

लगातार असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। बैंकिंग और बीमा क्षेत्र की प्रतियोगी परीक्षाओं में भी प्रयास जारी रखा। हालांकि इच्छित परिणाम नहीं मिले, लेकिन उन्होंने अपने अनुभव और ज्ञान को समाज के लिए उपयोगी बनाने का निर्णय लिया।

शिक्षण के साथ-साथ पिता डॉ. विरेन्द्र सिंह रावत की फुटबॉल अकादमी में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं प्रियांशी रावत।
शिक्षण के साथ-साथ पिता डॉ. विरेन्द्र सिंह रावत की फुटबॉल अकादमी में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं प्रियांशी रावत।

आज प्रियांशी रावत छात्रों को गणित, अंग्रेजी, सामान्य ज्ञान, सैनिक स्कूल, आरआईएमसी, एनडीए, सीडीएस और एसएसबी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करा रही हैं। उनके मार्गदर्शन में पढ़ने वाले कई छात्र रक्षा सेवाओं और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों में चयनित हो चुके हैं।

शिक्षण कार्य के साथ-साथ वह ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से काउंसलिंग, मोटिवेशन और करियर मार्गदर्शन का कार्य भी कर रही हैं। उनका मानना है कि सफलता का अर्थ केवल सरकारी नौकरी या किसी विशेष परीक्षा में चयन नहीं है, बल्कि अपनी क्षमता को पहचानकर सही दिशा में आगे बढ़ना भी सफलता ही है।

प्रियांशी के पिता डॉ. विरेन्द्र सिंह रावत का कहना है कि वर्तमान समय में परीक्षा परिणामों को लेकर युवाओं पर अत्यधिक मानसिक दबाव है। ऐसे में परिवार और समाज की जिम्मेदारी है कि वे युवाओं को असफलता से उबरने और नए अवसर तलाशने के लिए प्रेरित करें।

यह कहानी केवल एक युवती की नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं की है जो किसी परीक्षा, इंटरव्यू या मेरिट सूची में पीछे रह जाने के बाद खुद को असफल मान लेते हैं। प्रियांशी की यात्रा यह बताती है कि रास्ते बदल सकते हैं, लेकिन सपनों को जीने का जुनून नहीं बदलना चाहिए।

हर अपडेट सबसे पहले पाने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ें। Click Here.

The India Vox

The India Vox Editorial Team उत्तराखंड, राष्ट्रीय, शिक्षा, रोजगार, पर्यटन, स्वास्थ्य और जनहित से जुड़े विषयों पर तथ्यात्मक एवं निष्पक्ष समाचार प्रकाशित करता है। हमारी संपादकीय टीम विश्वसनीय स्रोतों और आधिकारिक सूचनाओं के आधार पर पाठकों तक सटीक जानकारी पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है।

Next Post

शिकायत-बहुल क्षेत्रों की होगी GIS मैपिंग, तय होगी अधिकारियों की जवाबदेही: डीएम

Mon Jun 22 , 2026
146 शिकायतें सुनकर डीएम ने दिए सख्त निर्देश, महिला उत्पीड़न मामलों में वन स्टॉप सेंटर को और मजबूत बनाने पर जोर Dehradun | June 22, 2026 जन शिकायतों के त्वरित और स्थायी समाधान को लेकर जिला प्रशासन अब और अधिक सख्त नजर आ रहा है। सोमवार को आयोजित समाधान दिवस […]
समाधान दिवस में डीएम सख्त, शिकायत क्षेत्रों की होगी GIS मैपिंग

You May Like

Chief Editor

Ravi Priyanshu

Ravi Priyanshu is a journalist, novelist, and Founder & Editor-in-Chief of The India Vox. With 23+ years of experience, he is dedicated to credible journalism and meaningful storytelling.

Share